Author : Shrestha Medhi

Expert Speak Raisina Debates
Published on Apr 08, 2026 Updated 1 Days ago

नाइजीरिया और अमेरिका का बढ़ता सैन्य सहयोग आतंकवाद से लड़ाई में मदद कर सकता है लेकिन आर्टिकल कहता है कि इससे अकेले साहेल क्षेत्र की समस्या खत्म नहीं होगी. असल दिक्कत नाइजीरिया के अंदर की कमजोरियों- जैसे कमजोर शासन और सुरक्षा व्यवस्था- में है, जिन्हें सुधारे बिना स्थायी समाधान मुश्किल है.

नाइजीरिया-अमेरिका डील: उम्मीदें ज्यादा या नतीजे?

फरवरी 2026 में, 200 अमेरिकी सैनिक नाइजीरिया पहुंचे, ताकि नाइजीरियाई सेना को आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण, खुफ़िया जानकारी और तकनीक में मदद कर सकें. पिछले साल क्रिसमस के दिन सोकोटो में इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ़्रीका प्रोविंस (ISWAP) को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद यह सैन्य सहयोग बढ़ा है. हालांकि, इन घटनाक्रमों से यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या नाइजीरिया-अमेरिका सहयोग नाइजीरिया में घरेलू असुरक्षा को प्रभावी ढंग से दूर कर सकेगा और इसे पूरे साहेल क्षेत्र में फैलने से रोक सकेगा या फिर इससे यहां अस्थिरता ही बढ़ेगी?

पिछले साल क्रिसमस के दिन सोकोटो में इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ़्रीका प्रोविंस (ISWAP) को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद यह सैन्य सहयोग बढ़ा है.

इसका उत्तर कठिन है और इससे नाइजीरिया के संकट का पूरा समाधान शायद ही हो सकेगा, पर यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम है. नाइजीरिया इस सहयोग का लाभ उठाकर उन्नत क्षमताएं विकसित कर सकता है और राजनीतिक लाभ ले सकता है. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की अस्थिर विदेश नीति को देखते हुए, नाइजीरिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाशिंगटन उसके हितों के साथ कोई समझौता न करे. नाइजीरिया में फरवरी 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में राष्ट्रपति बोला टीनुबू को इस साझेदारी का राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन केवल तभी, जब इससे संप्रभुता से समझौता किए बिना सुरक्षा में सुधार हो.

नाइजीरिया का सुरक्षा परिदृश्य

नाइजीरिया कई तरह के सुरक्षा संकटों में फंसा हुआ है. पूर्वोत्तर में, बोको हराम और ISWAP ने 2009 से विद्रोह छेड़ रखा है, जिसके कारण अकेले 2025 में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हुई. उत्तर-पश्चिम और मध्य के ग्रामीण इलाकों में डकैती, फिरौती के लिए अपहरण और किसान-चरवाहा संघर्ष ने बड़े पैमाने पर तनाव पैदा किए हैं, जिसको स्थानीय सुरक्षा बल संभाल नहीं पा रहे. ISWAP की गतिविधियां चाड झील क्षेत्र तक फैली हुई है और वह छोटे हथियारों की तस्करी, शरणार्थियों की आवाजाही व सीमा-पार आपराधिक नेटवर्क में शामिल है, जिस कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था नाइजर, चाड और कैमरून से भी जुड़ जाती है.

महत्वपूर्ण यह भी है कि नाइजीरियाई अधिकारियों ने कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास रखा है और नाइजीरियाई रक्षा मुख्यालय के प्रवक्ता मेजर जनरल समाइला उबा ने यह भरोसा दिया है कि अमेरिकी कर्मियों को ‘सलाहकार और प्रशिक्षण क्षमता’ तक सीमित रखा गया है, यानी कार्रवाई में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं होगी.

अबुजा के लिए अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने के स्पष्ट कारण हैं. इससे उसे खुफ़िया, निगरानी और टोही (ISR) से जुड़े उन्नत संसाधन मिल सकेंगे, लक्ष्य पाने में सफलता मिलेगी और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे स्थिरता लाने में मदद मिल सकती है. रक्षा ख़र्च ज़्यादा होने के बावजूद, नाइजीरियाई सेना वर्षों से विद्रोही हिंसा को नियंत्रित नहीं कर सकी है. अमेरिकी खुफ़िया विश्लेषकों और सैन्य प्रशिक्षकों के आने से, जो पूर्वोत्तर में मैदुगुरी सहित तीन प्रमुख स्थानों पर काम करेंगे, कार्रवाइयों को तेज करने और हवाई हमलों में सुधार लाने में मदद मिलेगी. ऐसा करना ज़रूरी है, क्योंकि नाइजीरिया की आतंकवाद रोधी अभियानों में गलती से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है. महत्वपूर्ण यह भी है कि नाइजीरियाई अधिकारियों ने कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास रखा है और नाइजीरियाई रक्षा मुख्यालय के प्रवक्ता मेजर जनरल समाइला उबा ने यह भरोसा दिया है कि अमेरिकी कर्मियों को ‘सलाहकार और प्रशिक्षण क्षमता’ तक सीमित रखा गया है, यानी कार्रवाई में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं होगी. यह आश्वासन संप्रभुता और विदेशी सैनिकों की मौजूदगी को लेकर आम लोगों की चिंताएं दूर करेगा. यह साहेल क्षेत्र में फ़्रांसीसी सैनिकों की ख़िलाफ़ हुई प्रतिक्रिया से सीखा गया एक महत्वपूर्ण सबक है.

वाशिंगटन की रणनीति 

अमेरिकी की नज़र में, नाइजीरिया की इस क्षेत्र में अच्छी-ख़ासी रणनीतिक अहमियत है. माली, बुर्किना फ़ासो और नाइजर से फ़्रांसीसी और यूरोपीय सेनाओं की वापसी या निष्कासन ने इस क्षेत्र में एक ऐसा शून्य पैदा किया, जिसे रूस के ‘अफ़्रीका कोर्प्स’ ने तेजी से भरा है. अमेरिका का उद्देश्य नाइजीरिया के साथ सहयोग बढ़ाकर अपनी खुफ़िया पहुंच को बनाए रखना, क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर प्रभाव बनाना और अपने व्यापक आर्थिक व समुद्री हितों की रक्षा करना है- विशेष रूप से गिनी की खाड़ी में.

फिर भी, संस्था-निर्माण या शासन सुधार के बजाय ट्रंप सरकार अफ़्रीका को लेकर छोटी-मोटी सौदेबाजी, संसाधनों तक पहुंच और सुरक्षा लाभ की अधिक सोचती है. 2025 की अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति अफ़्रीका को ‘संसाधन साम्राज्यवाद’ के रूप में देखती है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखलाओं और सुरक्षित आपूर्ति मार्गों पर ज़ोर दिया गया है.

ऐसे में, नाइजीरिया को अपनी राय मज़बूती से रखनी होगी, ताकि यह साझेदारी सिर्फ अमेरिका द्वारा खुफ़िया जानकारी जुटाने या शक्ति के प्रदर्शन का माध्यम न बने और नाइजीरिया की प्राथमिकता को पूरा करे. नाइजीरिया किसी एक ताक़त के साथ गठबंधन बनाने के बजाय रूस, चीन सहित कई शक्तियों के साथ रिश्ते बनाता रहा है. इसका उसे लाभ भी मिलता रहा है.

शासन व्यवस्था की विफलताएं, आर्थिक दिक्क़तें और समाज की शिकायतें भी नाइजीरिया की सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी हुई हैं, जिनका समाधान केवल बाहरी सैन्य सहायता से नहीं हो सकता. इसके लिए समावेशी शासन, जवाबदेह सुरक्षा बल और हाशिये के क्षेत्रों को विकास से जोड़ना ज़रूरी है.

साहेल क्षेत्र का तनाव इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ाता है, क्योंकि नाइजीरिया की अस्थिरता एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को जन्म दे सकती है. अकेले बुर्किना फ़ासो में 2023 में 8,000 से अधिक लोग मारे गए और 2024 के शुरुआती नौ महीनों में 6,100 बुर्किना फ़ासोवासियों की हत्या कर दी गई. मध्य साहेल क्षेत्र में अगस्त 2024 तक लगभग 50 लाख लोग विस्थापित हुए.

नाइजीरिया की राजनीति

अमेरिकी सहयोग का यह समय राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. नाइजीरिया में राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सभा के चुनाव 20 फरवरी, 2027 को होने वाले हैं. मई 2023 में पद संभालने वाले राष्ट्रपति टीनूबू पर सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और शासन सुधार का दबाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका की मदद से ऐसा यदि हो पाता है, तो उनको चुनाव में फायदा मिलेगा. हालांकि, इसके लिए चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ठोस नतीजे मिलने ज़रूरी हैं. यदि ऐसा नहीं होता है और हिंसा कम नहीं हो पाती, तो उन्हें नुकसान हो सकता है. यदि यह धारणा भी बन जाती है कि नाइजीरिया वाशिंगटन पर निर्भर हो गया है, तो इससे भी टीनुबू की साख कमज़ोर हो सकती है.

अमेरिका के साथ नाइजीरिया का सैन्य सहयोग ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब रूस साहेल क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और जेहादी हिंसा चरम पर है. क्या इस सहयोग से संकट का समाधान हो सकेगा? पूरी तरह से नहीं. शासन व्यवस्था की विफलताएं, आर्थिक दिक्क़तें और समाज की शिकायतें भी नाइजीरिया की सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी हुई हैं, जिनका समाधान केवल बाहरी सैन्य सहायता से नहीं हो सकता. इसके लिए समावेशी शासन, जवाबदेह सुरक्षा बल और हाशिये के क्षेत्रों को विकास से जोड़ना ज़रूरी है. जाहिर है, यह साझेदारी तभी कारगर होगी, जब नाइजीरिया प्रभावी ढंग से ट्रंप प्रशासन से बात करे और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखें.


श्रेष्ठा मेधी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में रिसर्च इंटर्न हैं. 
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