Author : Arpan Tulsyan

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Published on May 29, 2026 Updated 11 Days ago

पीएम श्री योजना का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाकर NEP 2020 को जमीन पर उतारना है लेकिन हर राज्य में इसका असर और रफ्तार अलग-अलग दिख रही है. कहीं स्कूल तेजी से नई सुविधाओं से बदल रहे हैं, तो कहीं फंड, तैयारी और विवादों के कारण काम धीमा है. जानिए, कैसे यह योजना देश के स्कूलों की तस्वीर बदलने की कोशिश कर रही है.

पीएम श्री: एक ही योजना, आठ अलग कहानियाँ

2022 में प्राइम मिनिस्टर स्कूल फॉर राइज़िंग इंडिया (PM SHRI) योजना की शुरुआत स्पष्ट राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ की गई: 14,500 से ज़्यादा मौजूदा सरकारी स्कूलों को ऐसे आदर्श संस्थानों में विकसित करना जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 का कार्यान्वयन को प्रदर्शित करेंगे. योजना के तहत पीएम श्री स्कूलों की कल्पना ऐसे संस्थानों के रूप में की गई जो सुरक्षित, पढ़ने के लिए प्रेरक माहौल, बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीक आधारित पढ़ाई, पर्यावरण अनुकूल शिक्षण पद्धतियां, समावेशी शिक्षा और बेहतर शिक्षण का अनुभव प्रदान करेंगे. आदर्श स्कूल होने के अलावा इनसे ये उम्मीद भी की गई कि वो पास के स्कूलों का भी मार्गदर्शन करेंगे और इस तरह व्यापक रूप से सरकारी स्कूलों में सुधार की जगह के रूप में काम करेंगे. 

Figure 1: Coverage of PM SHRI

The Many Pathways Of Pm Shri How States Are Shaping School Reform

Source: PM SHRI Dashboard

ये योजना अब अपने पांच साल के कार्यान्वयन चक्र (2022-23 से 2026-27) के अंतिम साल में प्रवेश कर गई है. जैसे-जैसे कार्यान्वयन आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पीएम श्री योजना इस बात की पड़ताल करने का अवसर प्रदान करती है कि कैसे भारत की संघीय प्रणाली में केंद्र द्वारा तैयार की गई आदर्श स्कूल योजना स्थानीय प्राथमिकताओं, प्रशासनिक क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और केंद्र-राज्य बातचीत से आकार ले रही है. वैसे तो इन स्कूलों को औपचारिक रूप से ‘राज्यों का मॉडल’ घोषित नहीं किया गया है फिर भी ये योजना के उभरते हुए कार्यान्वयन के तरीके हैं. ये लेख इन बिंदुओं के आधार पर पीएम श्री के अभी तक के कार्यान्वयन के बारे में बताता है और योजना के अगले चरण के बारे में सुझाव देता है. 

राज्यों का अलग अनुभव

आठ राज्यों (कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल) में पीएम श्री के अलग-अलग कार्यान्वयन के तरीके उभर रहे हैं. 

ओडिशा और मध्य प्रदेश पीएम श्री को लागू करने के मामले में एक व्यापक स्तर पर काम करने के तरीके का उदाहरण पेश करते हैं. ओडिशा में 840 स्कूलों का चयन पीएम श्री के तहत किया गया है जिन पर स्वीकृत आवंटन 2024-25 के लिए 435.03 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए 851.99 करोड़ रुपये हैं. 

योजना के तहत पीएम श्री स्कूलों की कल्पना ऐसे संस्थानों के रूप में की गई जो सुरक्षित, पढ़ने के लिए प्रेरक माहौल, बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीक आधारित पढ़ाई, पर्यावरण अनुकूल शिक्षण पद्धतियां, समावेशी शिक्षा और बेहतर शिक्षण का अनुभव प्रदान करेंगे.

मध्य प्रदेश भी इसी तरह का उदाहरण प्रस्तुत करता है: राज्य में 799 स्कूलों का चयन पीएम श्री के तहत किया गया था. हाल की रिपोर्ट से पता चलता है कि मध्य प्रदेश पीएम श्री का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं को व्यापक करने के लिए कर रहा है. इसमें ICT लैब, इंटरएक्टिव पैनल और डिजिटल लाइब्रेरी के साथ अटल टिंकरिंग लैब, वोकेशनल कोर्स, काउंसलिंग, खेल एवं संगीत गतिविधियां, लड़कियों के लिए सेल्फ-डिफेंस की ट्रेनिंग और प्रिंसिपल के लिए नेतृत्व का प्रशिक्षण शामिल हैं. 

कर्नाटक इस बात का एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करता है कि कैसे पीएम श्री योजना चुनिंदा स्कूलों से आगे बढ़कर एक व्यापक समूह को प्रभावित कर सकती है. कर्नाटक में 585 स्कूलों का चयन पीएम श्री के तहत किया गया है जिन्होंने कई मामलों में प्रगति दर्ज की है: 366 स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया गया, 15 स्कूलों में ICT एवं स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत की गई, 8 स्कूलों में लेबोरेटरी को अपग्रेड किया गया, 477 स्कूलों में समावेशी सुविधाएं विकसित की गयी, 585 स्कूलों में हरित पहल लागू की गई और पीएम श्री क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के तहत 1,077 शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई. 

हरियाणा में लगभग 250 स्कूलों का चयन पीएम श्री के तहत किया गया है लेकिन स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और दूसरी सुविधाओं के लिए फंड मिलना अभी बाकी है. कुछ स्कूल पूरी तरह योजना लागू होने का भी इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि उनकी CBSE मान्यता की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. ये उदाहरण दिखाता है कि आदर्श स्कूल के रूप में सुधार बुनियादी तैयारियों को नज़रअंदाज़ कर नहीं किया जा सकता है. 

वहीं पंजाब के नीयत में अधिक उतार-चढ़ाव दिखता है. पंजाब ने अक्टूबर 2022 में पीएम श्री को लागू करने के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए लेकिन जुलाई 2023 में इससे बाहर हो गया. उसके बाद जुलाई 2024 में वो एक बार फिर शामिल हो गया. अप्रैल 2026 तक पंजाब में 39 केंद्रीय विद्यालय और 23 नवोदय विद्यालय के अलावा 356 पीएम श्री स्कूलों का चयन किया गया है. 

पश्चिम बंगाल की पहले की आपत्तियां योजना की ब्रांडिंग को लेकर थी, विशेष रूप से केंद्र के द्वारा प्रायोजित योजना में पीएम श्री लिखने को लेकर जिसकी लागत का एक हिस्सा राज्य भी उठाता है. लेकिन इन राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र ने कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने की कोशिश की है. हालांकि ज़मीन पर इसका असर दिखना अभी बाकी है. 

इसी तरह पीएम श्री योजना केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में संघ-राज्य वार्ता में फंसी हुई है. केरल ने औपचारिक रूप से अक्टूबर 2025 में पीएम श्री के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए लेकिन राज्य में इस फैसले को लेकर विवाद है. ख़बरों के मुताबिक राज्य सरकार ने NEP 2020 को लेकर आपत्तियों और सत्ताधारी गठबंधन में चिंता के बीच इसके कार्यान्वयन को रोक दिया है. मार्च 2026 तक तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ही ऐसे दो राज्य हैं जिन्होंने योजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. तमिलनाडु का विरोध NEP 2020 और भाषा नीति से जुड़ा है. पश्चिम बंगाल की पहले की आपत्तियां योजना की ब्रांडिंग को लेकर थी, विशेष रूप से केंद्र के द्वारा प्रायोजित योजना में पीएम श्री लिखने को लेकर जिसकी लागत का एक हिस्सा राज्य भी उठाता है. लेकिन इन राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र ने कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने की कोशिश की है. हालांकि ज़मीन पर इसका असर दिखना अभी बाकी है. 

पीएम श्री को आगे क्या चाहिए?

राज्यों की तैयारी में अंतर को देखते हुए पीएम श्री के अगले चरण को अपने व्यापक लक्ष्यों को बरकरार रखते हुए इन शुरुआती बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए. जिन राज्यों में कार्यान्वयन में देरी हो रही है या विवाद है, वहां पहला काम समझौता करना, शर्तों को स्पष्ट करना और बुनियादी तैयारियों को सुनिश्चित करना है. जिन राज्यों में योजना लागू है, वहां आगे का रास्ता चुनिंदा स्कूलों के काम-काज में सुधार लाना और धीरे-धीरे इसके फायदे को व्यापक स्कूलों तक पहुंचाना होना चाहिए. इस संबंध में पांच सिफारिशें की जा सकती हैं: 

पहली सिफारिश, जो राज्य समझौता ज्ञापन या शुरुआती कार्यान्वयन से आगे नहीं बढ़े हैं, उन्हें सबसे पहले समयबद्ध तरीके से बुनियादी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए. 

दूसरी सिफारिश, केंद्र को बातचीत के ज़रिए राज्यों को तैयार करने के लिए गुंजाइश बनानी चाहिए. तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के अनुभव बताते हैं कि पीएम श्री को केवल एक तकनीकी योजना के रूप में नहीं देखा जा सकता है. इसे संघीय चिंताओं से जुड़े सवालों से भी गुज़रना होगा. 

तीसरी सिफारिश, जिन राज्यों में योजना लागू है, वहां पीएम श्री को आदर्श स्कूल बनाने की जगह पास के स्कूलों को मदद देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. चयन किए गए स्कूल धीरे-धीरे शिक्षकों के बीच तालमेल और साझा सुविधाओं के ज़रिए पास के स्कूलों के लिए स्थानीय संसाधन केंद्र बन सकते हैं. 

चौथी सिफारिश, पीएम श्री के परिणामों में केवल स्कूल चयन का ही नहीं बल्कि कार्यान्वयन की परिपक्वता का भी आकलन किया जाना चाहिए. एक चयनित आदर्श स्कूल, एक काम-काजी आदर्श स्कूल और एक मार्गदर्शक आदर्श स्कूल कार्यान्वयन परिपक्वता के तीन अलग-अलग चरण हैं. 

पांचवीं सिफारिश, योजना को बुनियादी ढांचे पर ज़्यादा निर्भर होने पर ध्यान नहीं देना चाहिए. इमारत, लैब और डिजिटल उपकरण के बारे में बताना शिक्षण की गुणवत्ता, छात्रों को समर्थन या क्लासरूम संस्कृति की तुलना में आसान है. इसलिए पीएम श्री के डैशबोर्ड को केवल भौतिक सुधार पर ही नहीं बल्कि शिक्षकों के प्रोफेशनल विकास, छात्रों में बदलाव, समावेशी संस्कृति, डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग और पास के स्कूलों के मार्गदर्शन पर भी निगरानी रखनी चाहिए.


अर्पण तुलस्यान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर न्यू इकोनॉमिक डिप्लोमेसी में सीनियर फेलो हैं.
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