किसी भी देश के हितों को साधने के लिए विदेश नीति के तौर पर खेल और उससे जुड़े पहलुओं का उपयोग स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी या खेल कूटनीति कहलाता है. यह जानना दिलचस्प होगा कि इतिहास में और हाल के समय में कई देशों ने स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का किस प्रकार उपयोग किया है. क्या गैर राजकीय लोग इस कूटनीति का हिस्सा होते हैं? क्या यह प्रक्रिया दो देशों के बीच के फ़ासले को कम करती है? क्या यह प्रक्रिया एक राजनयिक प्रयास के योग्य है? इन सभी सवालों के जवाब सचमुच रोचक हैं.
स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी ने हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है. हाल के समय में दो बड़ी घटनाओं ने डिप्लोमेसी और शासन की कूटनीति को गढ़ने में स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के बढ़ते महत्व और क्षमता को उज़ागर किया है. पहला उदाहरण मिल्केन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस का है जिसमे भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी, अमेरिका में ऑस्ट्रेलियाई राजदूत और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रुड, अमरीकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट फॉर पब्लिक डिप्लोमेसी एलिज़ाबेथ एलन और अमेरिका में पनामा के राजदूत रामोन मार्टिनेज़ डे ला गौरदिअ जैसे प्रमुख राजनयिकों की एक पैनल चर्चा में राष्ट्रों के बीच सहयोग और साथ मिलकर काम करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में खेल और स्वास्थ्य की भूमिका पर चर्चा की गई. पैनलिस्टों ने यह जानने का प्रयास किया कि राजनयिक प्रयासों को रफ़्तार देने और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बेहतर करने के लिए खेल और स्वस्थ्य क्षेत्रों का लाभ कैसे उठाया जा सकता है.
किसी भी देश के हितों को साधने के लिए विदेश नीति के तौर पर खेल और उससे जुड़े पहलुओं का उपयोग स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी या खेल कूटनीति कहलाता है. यह जानना दिलचस्प होगा कि इतिहास में और हाल के समय में कई देशों ने स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का किस प्रकार उपयोग किया है.
दूसरा उदाहरण सऊदी अरब के सार्वजनिक क्षेत्र के तेल और गैस का उपक्रम अरामको का है जो एक समझौते के तहत 2027 तक FIFA का विश्वव्यापी पार्टनर बना गया है. इस समझौते के अनुसार अरामको के पास आगे होने वाले FIFA प्रतियोगिताओं जैसे की 2026 वर्ल्ड कप और 2027 महिला वर्ल्ड कप के स्पॉन्सरशिप राइट्स होंगे. इसके अलावा सऊदी के पास इंग्लिश प्रीमियर लीग के क्लब न्यूकैसल यूनाइटेड का मालिकाना हक़ है और वह 2034 और 2035 के FIFA वर्ल्ड कप की मेज़बानी के भी बहुत करीब है. सऊदी ने कई सौ करोड़ डॉलर टेनिस, बॉक्सिंग, फॉर्मूला-1 , गोल्फ और हॉर्स रेसिंग जैसे खेलो में भी ख़र्च किए हैं.
'सॉफ्ट पावर’ की सबसे ‘सॉफ्ट कड़ी’
इन दोनों उदाहरणों को स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के बढ़ते महत्व को जानने के लिए समकालीन समय के आधारभूत मिसाल के रूप में देखा जाना चाहिए जो ऐतिहासिक संबंधों को भी प्रतिबिंबित करती है. स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी सांस्कृतिक कूटनीति के एक भाग के रूप में उभरी है जिसने निस्संदेह कई सीमाओं को धुंधला कर दिया है और देशों को समीप आने में योगदान दिया है. जबकि सार्वजनिक कूटनीति के माहिर और समर्थक तर्क देते हैं कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत केवल खेलों में शामिल होने से कई ज़्यादा कूटनीतिक पहल की आवश्यकता है पर यह विचार करना भी महत्वपूर्ण है कि क्या खेल इस कई मायनों में विभाजित दुनिया में टूटे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को पाटने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. लोग आज खेल को प्रभाव के सबसे नाजुक रूपों में से एक के रूप में देखते हैं क्योंकि इसे 'सॉफ्ट पावर’ की सबसे ‘सॉफ्ट कड़ी’ के रूप में जाना जाता है. इसे कभी भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि मीडिया, खेल प्रशंसक और स्वयं खेल युवाओं के सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है. स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी अपने साथ चुनौतियों, लागतों और विवादों को साथ लेकर आती है. लेकिन यह सांस्कृतिक कूटनीति में सहायक है. प्रोफेसर दया थुसू के अनुसार, "खेल हमेशा एक राष्ट्रीय ब्रांड या पहचान को बढ़ावा देने के मामले में सॉफ्ट पावर का एक रूप रहा है, और जिसका उपयोग स्वयं राष्ट्रों द्वारा अपने उत्पादों और संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता रहा है."
स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी अपने साथ चुनौतियों, लागतों और विवादों को साथ लेकर आती है. लेकिन यह सांस्कृतिक कूटनीति में सहायक है. प्रोफेसर दया थुसू के अनुसार, "खेल हमेशा एक राष्ट्रीय ब्रांड या पहचान को बढ़ावा देने के मामले में सॉफ्ट पावर का एक रूप रहा है, और जिसका उपयोग स्वयं राष्ट्रों द्वारा अपने उत्पादों और संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता रहा है."
इतिहास में भी खेल एक अंतरराष्ट्रीय योजना का हिस्सा रहा है. उदाहरण के लिए, उरुग्वे ने 1930 ने अपने पहले FIFA विश्व कप की मेज़बानी की और उसे जीता, 1934 में इटली ने अपने तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में FIFA विश्व कप की मेज़बानी की और उसे जीता. 2026 में उत्तरी अमेरिकी देशों कनाडा, मैक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) द्वारा FIFA विश्व कप की संयुक्त मेज़बानी की जाएगी. क़तर ने FIFA विश्व कप की मेजबानी करके शानदार अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया. इसके अतिरिक्त, क़तर के अमीर द्वारा लियोनेल मेस्सी को 'बिष्ट' की उपाधि दिए जाने से दुनिया भर में सनसनी पैदा कर दी, जिससे पब्लिक डिप्लोमेसी के छात्रों, व्यवसायियों और शिक्षाविदों के बीच इस विषय पर बहस हुई. सोशल मीडिया के अनुसार, क़तर में एक व्यक्ति के लिए एक ‘बिष्ट’ की उपाधि दिया जाना 'उच्च सम्मान और प्रशंसा' का सूचक है.
ओलंपिक का खेल निश्चय ही राष्ट्रों के लिए दुनिया को अपना कौशल दिखाने के अवसर के रूप में उभरा है. यह स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का एक विशिष्ट उदाहरण है. चीन ने 2008 के ओलंपिक खेल के साथ यह उपलब्धि हासिल की. अपनी स्थापना के समय से ही ओलंपिक आंदोलन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय युवाओं में शांति और जीवन के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना रहा है. ओलंपिक ने अपनी वेबसाइट पर कुछ अभूतपूर्व कहानियों को साझा किया है जो बयां करते है कि ओलंपिक ने चीन को कैसे प्रभावित किया है. विशेष रूप से शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में. "ओलंपिक खेलों के लिए धन्यवाद, लगभग 40 करोड़ युवा ओलंपिक शिक्षा कार्यक्रमों से लाभान्वित हुए हैं. ओलंपिक मूल्य और ओलंपिक से संबंधित विषय इन कार्यक्रमों का केंद्र बिंदु थे, जो विदेशी भाषाओं जैसे नए कौशल भी सिखाते थे.” लोगों ने 2008 के ओलंपिक को वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के चीन के प्रयास के रूप में माना. NBC की एक रिपोर्ट के अनुसार ओलंपिक की मेज़बानी के साथ-साथ ओलंपिक को देखने का प्रत्यक्ष बायप्रोडक्ट क्या था, "चीन में एकत्र होने वाली भीड़ का स्वागत करने के प्रयास में हजारों नियमित नागरिकों ने सरकार द्वारा संचालित अंग्रेजी और शिष्टाचार कक्षाओं में दाखिला लिया और यह भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश टीम US की हौसला अफ़ज़ाई के लिए बीजिंग में दर्शको के बीच मौजूद रहे.“
चीन ने ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन ओलंपिक की मेज़बानी की थी और ओलंपिक की मेज़बानी करने में भारी लागत आती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत लॉस एंजिल्स की राह पकड़ेगा जो उसने 1979 में लिया था. जब लॉस एंजिल्स ने किसी भी भव्य ख़र्च या अन्य सस्टेनेबल आइडिया के बजाय पूरी तरह से मौजूदा स्टेडियमों और अन्य बुनियादी ढांचे का उपयोग करके ओलंपिक करवाने की अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ शर्तों पर बातचीत की थी. भारत ने 2036 में ओलंपिक की मेज़बानी की योजना बनाई है. दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में अपनी वापसी करेगा और इसकी घोषणा अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी के भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में 1 वर्ष के पुरे होने पर बनाई वीडियो में की थी. इससे पहले क्रिकेट सिर्फ 1990 ओलंपिक का हिस्सा रहा है.
भारत का ‘बाहुबली’ आईपीएल
भारत ने क्रिकेट में शानदार मुकाम हासिल किया है. सरकारी तंत्र से दूर रहकर भी भारत में क्रिकेट के खेल को बहुत बढ़ावा मिला है. हालांकि क्रिकेट की उत्पत्ति इंग्लैंड में हुई लेकिन चाहे वह इंडियन प्रीमियर लीग हो या विदेश में खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम, इस खेल में हो रहे जबरदस्त वित्तीय लाभ ने भारत को एक आकर्षक क्रिकेट पावर हाउस बना दिया है. एक तरह से देखा जाए तो IPL की सफ़लता का एक उल्लेखनीय पहलू भारत में इस लीग की उत्पत्ति के बावजूद दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय स्टेडियमों में भीड़ जुटाने की क्षमता थी. IPL पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कई अध्ययन है जो IPL के प्रभाव का विश्लेषण और संश्लेषण करते हैं. कुछ रिपोर्टों के अनुसार IPL आज की तारीख़ में अमेरिकी फुटबॉल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे अमीर खेल फ्रेंचाइजी है. IPL के प्रसारण अधिकार अनुबंध को पांच सीजन (2023–2027) के लिए 6.02 अरब डॉलर मिले हैं. KPMG के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में लीग का योगदान भी बहुत अधिक है. टूर्नामेंट ने 2021 में INR 11.5 बिलियन (US $18.2 करोड़) का योगदान दिया. इसके अतिरिक्त, UN जनरल असेंबली फॉर पीस एंड डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट ने इसके आर्थिक मूल्य का अनुमान 3.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर लगाया है. IPL आज दुनिया भर में 30 करोड़ से अधिक दर्शकों द्वारा देखा जाता है. IPL को वैश्विक खेलों के एक ‘बाहुबली’ के रूप में वर्णित करना अतिशयोक्ति नहीं होगी. IPL ने कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय T20 लीगों की शुरुआत को प्रेरित किया है.
IPL पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कई अध्ययन है जो IPL के प्रभाव का विश्लेषण और संश्लेषण करते हैं. कुछ रिपोर्टों के अनुसार IPL आज की तारीख़ में अमेरिकी फुटबॉल के बाद दुनिया की दूसरी सबसे अमीर खेल फ्रेंचाइजी है.
बोर्ड ऑफ़ क्रिकेट कंट्रोल इन इंडिया (BCCI) ने अफ़ग़ानिस्तान और नेपाल के क्रिकेट टीम का समर्थन और पोषण किया है और साथ ही मालदीव के साथ भी 'क्रिकेट कूटनीति' को उपयोग किया है. आज अमूल और नंदिनी जैसे भारतीय डेयरी कंपनियां दक्षिण अफ्रीका, US, श्रीलंका और स्कॉटलैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों को प्रायोजित कर रही हैं. उल्लेखनीय है कि इस साल का विश्व T20 पहली बार वेस्टइंडीज और अमेरिका में होगा.
भारतीय शतरंज कोच रोमानिया और नॉर्वे जैसे देशों में विदेशी नागरिकों को भी कोचिंग दे रहे हैं.
लेकिन क्या खेल कूटनीति से ठोस नीतिगत लाभ हो सकता है? कम से कम प्रसिद्ध 'पिंग पोंग कूटनीति' के मामले में तो ऐसा हुआ है. चीनी सांस्कृतिक क्रांति के बाद 1971 में चीन ने अमेरिका से टेबल टेनिस खिलाड़ियों को आमंत्रित किया और इसे प्रसिद्ध रूप से 'पिंग पोंग कूटनीति' कहा जाता है. इस घटना ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की यात्रा का मार्ग प्रशस्त किया. अमेरिकी दस्तावेज़ यह भी दर्शाते हैं कि कैसे पिंग-पोंग कूटनीति ने अमेरिका और चीन के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए जमीन तैयार करने में मदद की. अमेरिका स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को विदेश नीति के विकास में सहायक के रूप में देखता है.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक अन्य मामला जिसमें ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 'स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी 2030' योजना की परिकल्पना की है और यह बात उल्लेखनीय है. इस योजना ने स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को ऑस्ट्रेलिया के राजनयिक कार्य का एक अभिन्न हिस्सा बना दिया है. 'स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी 2030' में ऑस्ट्रेलियाई खेल संहिताओं, उद्योग और सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग की परिकल्पना की गई है ताकि देश की खेल उत्कृष्टता का लाभ ऑस्ट्रेलिया के प्रभाव और प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए और राष्ट्रीय हितों को साधने के लिए उपयोग किया जा सके. ऑस्ट्रेलिया का यह कदम इन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए चार रणनीतिक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को रेखांकित करता है. वैश्विक स्तर पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई खेल को सशक्त बनाना, पड़ोसियों के साथ संबंध बनाना, व्यापार, पर्यटन और निवेश के अवसरों को अधिकतम करना और हिंद-प्रशांत इलाके में सामुदायिक भावना को मजबूत करना है. इन रणनीतियों का मूल्यांकन करना आवश्यक है, क्योंकि यह किसी राष्ट्र के राजनयिक ढांचे में स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के विलय को औपचारिक रूप देता है.
स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी पूरे इतिहास में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपकरण रही है, जो देशों को राष्ट्रीय कौशल का प्रदर्शन करने, नीतिगत लाभ को बढ़ाने और राष्ट्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है. सीमाओं के परे लोगों को इकट्ठा करने और एकजुट करने की इसकी क्षमता इसे राजनयिक कार्यों के लिए एक शक्तिशाली साधन बनाती है. हालांकि, स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने और खेल के दायरे से परे जाने के लिए ठोस नीतियां और राजनयिक व्यवहार कुशलता आवश्यक है जो खेल के आदान-प्रदान के माध्यम से उत्पन्न सद्भावना और सहयोग को कूटनीति और स्टेट-क्राफ्ट के व्यापक संदर्भ में ठोस परिणामों में बदल सकते हैं.
सुदर्शन रामभद्रन एक पालिसी एक्सपर्ट, लेखक और अंतर्राष्ट्रीय संचार और सार्वजनिक कूटनीति के विशेषज्ञ हैं.
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