Author : Tanya Aggarwal

Expert Speak Digital Frontiers
Published on May 24, 2024 Updated 0 Hours ago

आज जब डिजिटल ट्विन तकनीक लगातार विकसित हो रही है, तो इसका असर तमाम उद्योगों पर दिखाई दे रहा है. लेकिन, स्पष्ट नियम क़ायदों के बग़ैर, इस विकास को संतुलित तरीक़े से प्रोत्साहित करने का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है.

आख़िर क्या है डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी? तकनीक़ को समझने की कोशिश...

अब जबकि तकनीक, डिजिटल और वास्तविक दुनिया को आपस में ज़्यादा मज़बूती से जोड़ रही है, तो डिजिटल ट्विन तकनीक एक अपरिहार्य औज़ार के तौर पर उभरकर सामने आई है, जो उद्योगों को ढाल रही है और क्रियान्वयन में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है. शुरुआत में इन डिजिटल जुड़वां की परिकल्पना मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में की गई थी, ताकि वर्चुअल दुनिया में भौतिक दुनिया के हमशक्ल तैयार किए जा सकें. लेकिन अब ये तकनीक स्वास्थ्य सेवा से लेकर शहरी योजना निर्माण तक, तमाम क्षेत्रों में फैल रही है, और इससे कुशलता, आविष्कार और स्थायित्व को बढ़ावा मिल रहा है. देशों की सरकारों के साथ साथ, संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी डिजिटल युग्म (Twin) तकनीक के इस्तेमाल और डिजिटल अर्थव्यवस्था में उनके योगदान की संभावनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने में काफ़ी अहम भूमिका निभा सकते हैं. वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन ऐंड इनफार्मेशन सोसाइटी डे जैसे मंच भी जागरूकता बढ़ाने की इन कोशिशों को कार्यकारी रूप देने में सहयोग कर सकते हैं. भारत में डिजिटल ट्विन तकनीकों को आविष्कार के साथ जोड़ने की कोशिशें हमें सरकारी औऱ निजी दोनों क्षेत्रों की पहलों में दिखाई दे रही हैं. चूंकि अभी ये विकास के शुरुआती स्तर पर ही हैं. ऐसे में नियमन करने वालों के लिए ये काफ़ी महत्वपूर्ण हो जाता है कि वो इस तकनीक में तेज़ गति से हो रहे बदलाव पर बारीक़ नज़र रखें. नियमन व्यवस्था में प्रगति और अहम भागीदारों के साथ सहयोग करने से, विकास में डिजिटल ट्विन्स के योगदान दे पाने में अपार संभावनाएं दिख रही हैं.

 

डिजिटल ट्विन (जुड़वां या युग्म) क्या है?

 

कोई डिजिटल ट्विन, किसी भौतिक वस्तु या व्यवस्था का वर्चुअल हमशक्ल होता है. ये कोई स्थिर मॉडल नहीं होता, बल्कि एक ऊर्जावान हमशक्ल होता है, जो वास्तविक दुनिया के अपने हमशक्ल के बर्ताव की नक़ल करता है. ये हमशक्ल सेंसर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के उपकरणों और डेटा के अन्य स्रोतों के ज़रिए अपने भौतिक समकक्ष से जुड़ा होता है, जिससे दोनों के बीच डेटा का आदान प्रदान हो पाता है. ‘डिजिटल ट्विन’ शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल 2002 में मिशिगन यूनिवर्सिटी के डॉक्टर माइकल ग्रिवेज़ ने किया था. शुरुआत में इसकी परिकल्पना मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए की गई थी. हालांकि अब ये विचार बहुत व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है. तमाम मंज़रों की वर्चुअल नक़ल करके और डेटा के विश्लेषण के ज़रिए डिजिटल ट्विन, आने वाले समय में रख-रखाव, ऑपरेशन के अधिकतम उपयोग और किसी उत्पाद के विकास में इनोवेशन को बढ़ावा देते हैं. डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और शहरी योजना निर्माण जैसे तमाम उद्योगों में निगरानी करने, विश्लेषण करने और भौतिक संपदाओं और प्रक्रियाओं के काम को बेहतरीन बनाने के लिए किया जा रहा है. डिजिटल ट्विन अलग अलग परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं, नतीजों की भविष्यवाणी कर सकते हैं और अहम विश्लेषण करके निर्णय प्रक्रिया को आसान बनाने में योगदान देते हैं.

 डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और शहरी योजना निर्माण जैसे तमाम उद्योगों में निगरानी करने, विश्लेषण करने और भौतिक संपदाओं और प्रक्रियाओं के काम को बेहतरीन बनाने के लिए किया जा रहा है.

कोई डिजिटल जुड़वां सिम्युलेशन यानी किसी परिस्थिति के कंप्यूटर मॉडल से अलग होता है. सिम्युलेशन (simulation) एक व्यापक परिकल्पना है, जिसमें किसी सिस्टम या प्रक्रिया का एक मॉडल तैयार करके अलग अलग हालात और परिस्थितियों में उसके बर्ताव का अध्ययन किया जाता है. जहां डिजिटल ट्विन आम तौर पर किसी ख़ास भौतिक वस्तु या व्यवस्था और उसके वास्तविक बर्ताव की नक़ल होता है. वहीं, सिम्युलेशन ज़्यादा आम फहम होते हैं और ज़रूरी नहीं होता कि वो अपने भौतिक समकक्ष से सीधे तौर पर जुड़े हों. वैसे तो डिजिटल ट्विन और सिम्युलेशन दोनों ही वास्तविक जीवन कि गतिविधियों के वर्चुअल स्वरूप होते हैं. पर, डिजिटल ट्विन भौतिक संपत्तियों से अक्सर सीधे तौर पर जुड़े विशिष्ट और ऊर्जावान हमशक़्ल होते हैं. वहीं, सिम्युलेशन ज़्यादा आम होते हैं और ज़रूरी नहीं होता कि उनका किस भौतिक वस्तु या व्यवस्था से सीधे तौर पर संवाद हो. 

 

मेटावर्स में डिजिटल ट्विन

 

मेटावर्स वो वर्चुअल दुनिया होती है, जहां यूज़र एक दूसरे से डिजिटल माहौल में संवाद करते हैं. ये दुनिया कई तरह से डिजिटल ट्विन तैयार करने पर असर डालती है. जैसे मेटावर्स की दुनिया विकसित हो रही है, उसे देखते हुए डिजिटल ट्विन इमर्सिव और आपस में जुड़ों वर्चुअल विश्वों को तैयार करने का आधार बन सकते हैं. पहले, डिजिटल ट्विन यूज़र्स को मेटावर्स में अपने बेहद समर्पित और सटीक हमशक्ल तैयार करने के लिए सशक्त बनाते हैं, इससे वास्तविक वो मेटावर्स में अपने वास्तविक दुनिया के अवतार के रूप में बेहद निजी वर्चुअल अनुभव प्राप्त कर पाते हैं. मिसाल के तौर पर वर्चुअल ख़रीदारी के अनुभवों में किसी उत्पाद के डिजिटल जुड़वां यूज़र्स को एकदम सटीक तस्वीर उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें वो ख़रीदने से पहले देख समझ सकते हैं. यही नहीं, डिजिटल ट्विन, मेटावर्स के अलग अलग प्लेटफॉर्मों और व्यवस्थाओं के बीच बिना किसी बाधा के संचालन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, जिससे अलग अलग वर्चुअल माहौलों के बीच अबाध संवाद और संचार मुमकिन हो पाता है. एक से ज़्यादा परिस्थितियों में कार्य करने पाने की इस ख़ूबी से आपस में जुड़े अनुभवों के निर्माण को बढ़ावा मिलता है और वैश्विक स्तर पर सहयोग और आविष्कार में भी मदद मिलती है. मेटावर्स की गहराई, समृद्धि और क्रियाकलापों को डिजिटल जुड़वां इसे तमाम क्षेत्रों में व्यापक विस्तार दे सकते हैं. इसके अतिरिक्त, डिजिटल हमशक्ल व्यक्तिगत स्तर के अनुभवों से आगे बढ़ाते हुए पूरे इकोसिस्टम की नुमाइंदगी कर सकते हैं, जैसे कि स्मार्ट शहर, औद्योगिक इकाइयां या फिर प्राकृतिक माहौल हो. वास्तविक समय के आंकड़ों और सिम्युलेशन को एकीकृत करके ये डिजिटल हमशक़्ल एक ऊर्जावान और प्रतिक्रिया देने वाले ऐसे वर्चुअल विश्व तैयार करने में मददगार होते हैं, जो अपने भौतिक समकक्षों से बहुत बारीक़ी से मिलते हैं.

 

उद्योग और उपयोग

 

डिजिटल हमशक्ल एक क्रांतिकारी तकनीक के तौर पर उभरे हैं, जिनके तमाम उद्योगों में बहुत से इस्तेमाल हो सकते हैं. इससे संगठनों के संचालन के तौर-तरीक़ों में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है. वो हमें मॉडलिंग, निगरानी और जटिल प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के अधिकतम उपयोग के बहुमुखी और ताक़तवर प्लेटफार्म उपलब्ध कराते हैं. भौतिक और डिजिटल दुनिया को आपस में जोड़ते हुए ये डिजिटल ट्विन संगठनों को आंकड़ों के आधार पर फ़ैसले लेने, आविष्कार को बढ़ावा देने और अपने काम में अधिक कुशलता, लचीलापन और स्थायित्व हासिल करने में सशक्त बनाते हैं.

 वास्तविक समय के आंकड़ों और सिम्युलेशन को एकीकृत करके ये डिजिटल हमशक़्ल एक ऊर्जावान और प्रतिक्रिया देने वाले ऐसे वर्चुअल विश्व तैयार करने में मददगार होते हैं, जो अपने भौतिक समकक्षों से बहुत बारीक़ी से मिलते हैं.

-मैन्युफैक्चरिंग: किसी भौतिक उपकरण, उत्पादन की श्रृंखला और पूरे के पूरे कारखानों की वर्चुअल नक़ल तैयार करके डिजिटल जुड़वां उनके कामकाज, सेहत और मशीनरी की कुशलता और प्रक्रियाओं के वास्तविक अनुभवों के बारे में अहम जानकारी मुहैया कराते हैं. निर्माता इस जानकारी का इस्तेमाल करते हुए वक़्त से पहले ही संभावित दिक़्क़तों का पता लगा सकते हैं, उत्पादन की कार्यक्रम का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं और काम रुकने का समय कम से कमतर कर सकते हैं और इस तरह उत्पादकता में इज़ाफ़ा और संचालन की लागत में कमी कर सकते हैं. 

-उत्पाद की जीवन अवधि का प्रबंधन: इंजीनियर किसी उत्पाद का वर्चुअल प्रोटोटाइप तैयार करके अलग अलग परिस्थितियों में उनके व्यवहार का मॉडल तैयार कर सकते हैं. इससे, किसी उत्पाद का प्रोटोटाइप बनाने से पहले ही विकास की प्रक्रिया के दौरान डिज़ाइन में सुधार किया जा सकता है. इससे किसी उत्पाद के विकास का चक्र तेज़ हो पाता है और निर्माताओं को उच्च गुणवत्ता वाले ऐसे उत्पाद बनाने में मदद मिलती है, जो ग्राहकों की ज़रूरतों को पूरा कर सकें.

 

-स्वास्थ्य सेवा: हर मरीज़ के मेडिकल डेटा के आधार पर उसका एक वर्चुअल हमशक्ल तैयार करके, डॉक्टर ख़ास उनके इलाज की योजनाएं तैयार कर सकते हैं. अलग अलग परिस्थितियों के मुताबिक़ उनमें बदलाव ला सकते हैं और इलाज के नतीजों का ज़्यादा सटीक पूर्वानुमान लगा सकते हैं. इस तरीक़े को ‘ख़ास मरीज़ पर केंद्रित मॉडलिंग’ कहा जाता है, और ये सर्जरी या फिर भयंकर बीमारियों के इलाज की योजनाओं जैसी जटिल मेडिकल प्रक्रियाओं में विशेष रूप से मूल्यवान साबित होते हैं. इनसे मरीज़ों की दूर बैठकर निगरानी की जा सकती है. जिससे स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों को अहम संकेतों की निगरानी कर पाने, दवा लेने के नियमों का पालन कर पाने और सेहत के पूरे मूल्यांकन को बिल्कुल सटीक समय पर कर पाने में मदद मिलती है, जिससे डॉक्टर सक्रियता से मरीज़ की देखभाल करके उनकी सेहत के बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं.

 आज डिजिटल हमशक्ल स्मार्ट मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और फ्लीट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में आविष्कारों की अगुवाई कर रहे हैं.

-परिवहन का सेक्टर: आज डिजिटल हमशक्ल स्मार्ट मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और फ्लीट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में आविष्कारों की अगुवाई कर रहे हैं. गाड़ियों, परिवहन के नेटवर्कों और मूलभूत ढांचों की नक़ल तैयार करके इनसे जुड़े भागीदार, रास्तों का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं, ईंधन की खपत कम सकते हैं और पूरी परिवहन व्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार ला सकते हैं. मिसाल के तौर पर ऑटोमोटिव उद्योग में डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल गाड़ी के व्यवहार का मॉडल तैयार करने और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम विकसित करने में किया जा रहा है. इसी तरह, उड्डयन उद्योग में डिजिटल हमशक्ल एयरलाइन कंपनियों को विमानों के संचालन का अधिकतम दोहन करने, रखरखाव की ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाने और हर यात्री के निजी अनुभव को बेहतर बनाकर यात्रियों के तजुर्बों में सुधार लाया जा रहा है.

 

-शहरी योजना निर्माण: शहरों और नगरीय मूलभूत ढांचों के वर्चुअल हमशक्ल तैयार करने से शहरी योजना बनाने वालों को नए विकास, मूलभूत ढांचे की परियोजनाओं, हवा की गुणवत्ता और जनसेवाओं के असर का अंदाज़ा लगाने में मदद मिलती है. वास्तविक स्थिति के प्रति जागरूकता देकर और क़ुदरती आपदाओं और अन्य संकटों के पूर्वानुमान वाले मॉडल तैयार करने में मदद करके डिजिटल ट्विन आपातकालीन स्थिति से निपटने की योजना बनाने और आपदा प्रबंधन में भी सहायता दे सकते हैं.

 

भारत में डिजिटल ट्विन

 

निजी क्षेत्र में ऐसे तमाम स्टार्ट-अप हैं, जो डिजिटल हमशक्लों को देश के अन्य सेक्टरों में इस्तेमाल करने के लिए काम कर रहे हैं. मिसाल के तौर पर पाणिनियन अंतरिक्ष के उत्पादों के लिए डिजिटल ट्विन विकसित करता है. ट्विनग्रिड लैब्स, ख़ास उद्योगों के लिए डिजिटल जुड़वां तैयार करते हैं ताकि क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग में सुधार कर सकें. इसी तरह स्विचऑन उनका इस्तेमाल उत्पादन के परिणामों का पूर्वानुमान लगाने, जैस कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए निरीक्षण को स्वचालित बनाने के लिए करती है. भारत सरकार ने भी आर्थिक विकास और आविष्कारों को बढ़ावा देने में डिजिटल जुड़वां तकनीक की संभावनाओं को समझा है. संगम: डिजिटल ट्विन जैसी पहलों का मक़सद 2035 तक बड़े शहरों के डिजिटल हमशक्ल तैयार करना है. ये तमाम सेक्टरों के बीच काम करने वाली पहल है, जो उद्योग, अकादमिक क्षेत्र और स्टार्टअप के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर उभरती हुई तकनीकों की क्रांतिकारी भूमिका को रेखांकित करती है. दूरसंचार सचिव ने संगम की पहल की संभावनाओं पर ज़ोर देते हुए कहा था कि इसने भारत के मूलभूत ढांचे के क्षेत्र में क्रांतिकारी भूमिका अदा की है. भारत सरकार ने नीति निर्माण, शहरी योजना बनाने और आपदा प्रबंधन में सुधार लाने के लिए निजी मैपिंग कंपनी जेनेसिस इंटरनेशनल से समझौता किया है. वैसे तो ये सही दिशा में बढ़ाया गया क़दम है. लेकिन, डिजिटल ट्विन के इस्तेमाल के पूरे इस्तेमाल के लिए आम रूप-रेखा के अभाव की वजह से स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में देश की बिजली के इकोसिस्टम के डिजिटल जुड़वां की मदद से सुधार लाने की संभावनाओं का अधिकतम दोहन नहीं किया जा सका है.

 आज जब डिजिटल ट्विन तकनीक लगातार विकसित हो रही है, तो इसका प्रभाव तमाम उद्योगों पर और बढ़ना ही है. सरकारें तमाम क्षेत्रों में नीति निर्माण, सक्रिय योजना निर्माण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन में अधिक कुशलता ला सकती हैं

आज जब डिजिटल ट्विन तकनीक लगातार विकसित हो रही है, तो इसका प्रभाव तमाम उद्योगों पर और बढ़ना ही है. सरकारें तमाम क्षेत्रों में नीति निर्माण, सक्रिय योजना निर्माण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन में अधिक कुशलता ला सकती हैं, जिससे आख़िरकार जनसेवाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा. डिजिटल ट्विन जैसी नई तकनीकों पर परिचर्चा के मंचों से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू, दोनों ही स्तरों पर डिजिटल खाई को पाटने में और संयुक्त राष्ट्र के स्थायी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति करने में मदद मिलेगी. अहम भागीदारों के साथ सहयोग के प्रयासों और नियम क़ायदों में प्रगति के ज़रिए डिजिटल ट्विन, तमाम क्षेत्रों को बेहतर बनाने की काफ़ी संभावनाएं रखते हैं. लेकिन, स्पष्ट नियमों या फिर मौजूदा स्तर पर साफ़ दिशा निर्देशों की स्थापना न होने से इसके विकास को संतुलित तरीक़े से आगे बढ़ाने का रास्ता अनिश्चित है. निजी क्षेत्र की अगुवाई में तकनीकी तरक़्क़ी से लगातार बने हुए वैश्विक मसलों के नए नए समाधान निकाले जा सकते हैं, जो पूर्व की तकनीकी प्रगतियों के विकास का अनुकरण करते हों. ऐसे मामलों में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है: उसे चाहिए कि वो इस तकनीक से मिल रहे लाभों का समतावादी और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करे.

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