Author : Hari Bansh Jha

Published on Jun 14, 2023 Updated 0 Hours ago
नेपाल में फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले को लेकर नाराज़गी

फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले के विरोध में नेपाल के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस घोटाले में नेपाल के 875 नागरिकों से चालबाज़ों के एक गिरोह ने करोड़ों रुपये ठगे. चालबाज़ों के इस गिरोह में सरकार के बड़े अधिकारी और यहां तक कि पूर्व मंत्री भी शामिल हैं. भूटानी शरणार्थी के रूप में लोगों को अमेरिका ले जाने के झूठे वादे के नाम पर उनसे ठगी की गई. इस स्तर के भ्रष्टाचार से नेपाली समाज में नाराज़गी है. 

नेपाल के सामान्य लोगों के साथ-साथ अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) भी फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित हैं. काफ़ी हद तक ये माना जाता है कि अमेरिका इस मामले की अच्छी तरह से छानबीन को लेकर नेपाल सरकार पर दबाव बना रहा है. इस तरह की अटकलें हैं कि अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) जांच में शामिल है क्योंकि अमेरिका ने नेपाल में रहने वाले भूटान के शरणार्थियों को बड़ी संख्या में बसने की इजाज़त दी थी. 

नेपाल के सामान्य लोगों के साथ-साथ अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) भी फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित हैं. काफ़ी हद तक ये माना जाता है कि अमेरिका इस मामले की अच्छी तरह से छानबीन को लेकर नेपाल सरकार पर दबाव बना रहा है.

मगर नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने बयान दिया कि, “मुझे नहीं लगता कि FBI सीधे तौर पर फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थियों से जुड़े घोटाले की जांच में शामिल है या इसको प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. लेकिन अमेरिका ने ज़रूर अपनी चिंता दिखाई होगी और मुझे लगता है वो नज़र रख रहे होंगे.” दहल ने आगे कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय के साथ-साथ नेपाल पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वो छानबीन की प्रक्रिया के साथ आगे बढ़े ताकि दोषियों को छोड़ा नहीं जाए और निर्दोष फंसे नहीं

ऐतिहासिक संदर्भ

1990-1993 के बीच नेपाली बोलने वाले कई भूटानी नागरिकों को भूटान सरकार के द्वारा उनकी मातृभूमि से निष्कासित किया गया. इस कार्रवाई के बाद वो नेपाल में दाखिल हुए और उन्हें नेपाल के पूर्वी हिस्से के अलग-अलग कैंपों में बसना पड़ा. बाद में भूटान लौटने की उनकी सारी उम्मीदें ख़त्म हो गईं. इस तरह 2007 के बाद तीसरे देश में पुनर्वास योजना के तहत कुल 1,20,000 में से लगभग 95 प्रतिशत शरणार्थियों को आठ अलग-अलग देशों में बसाया गया. इन देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. अकेले अमेरिका ने 75 प्रतिशत (90,000) शरणार्थियों को जगह दी. लेकिन 2016 में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) के द्वारा तीसरे देश में पुनर्वास की प्रक्रिया बंद किए जाने के बाद 5 प्रतिशत (6,000) भूटानी शरणार्थी कैंप में बने रहे. 

कई भूटानी शरणार्थी नेपाल में कुछ हद तक अपनी ज़्यादा उम्र और कुछ हद तक दस्तावेज़ों से जुड़ी परेशानियों की वजह से बने रहे. कुछ ने तो अमेरिका या किसी दूसरे देश में जाने से भी मना कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि वहां जाने के बाद वो भविष्य में अपनी मातृभूमि भूटान में कभी लौट नहीं पाएंगे. कुछ ऐसे भी शरणार्थी थे जो अपने आपराधिक रिकॉर्ड की वजह से तीसरे देश में नहीं जा पाए. 

कई भूटानी शरणार्थी नेपाल में कुछ हद तक अपनी ज़्यादा उम्र और कुछ हद तक दस्तावेज़ों से जुड़ी परेशानियों की वजह से बने रहे. कुछ ने तो अमेरिका या किसी दूसरे देश में जाने से भी मना कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि वहां जाने के बाद वो भविष्य में अपनी मातृभूमि भूटान में कभी लौट नहीं पाएंगे.

अब पूर्वी नेपाल में अभी भी रहने वाले भूटानी शरणार्थी इस बात का दुख मना रहे हैं कि नेता और नौकरशाह उनकी मुसीबतों से फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. 2016 में तीसरे देश में पुनर्वास की योजना ख़त्म होने के बाद शरणार्थी कैंपों में बचे सभी लोग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे कि विश्व खाद्य कार्यक्रम, UNHCR या किसी अन्य मानवीय एजेंसी से नकद या किसी तरह के सामान की मदद हासिल नहीं कर रहे हैं. गुज़र-बसर करने के लिए उनके पास मज़दूरों के तौर पर काम करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. कुछ शरणार्थी विदेश में रहने वाले अपने सगे-संबंधियों से वित्तीय सहायता हासिल कर रहे हैं लेकिन बाक़ी बचे लोग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 

शरणार्थी घोटाला

हालात की गंभीरता को समझते हुए नेपाल के उप प्रधानमंत्री और गृह मामलों के मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा कि सरकार फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि जो घोटाला हुआ वो महज़ भ्रष्टाचार का एक मामला नहीं है बल्कि देश के ख़िलाफ़ एक संगठित अपराध है. 

इस बीच में UNHCR ने फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले की छानबीन के सरकार के क़दम का स्वागत किया है. लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी पार्टी CPN-UML के नेता केपी शर्मा ओली ने सरकार पर छानबीन के दौरान दोषियों को बचाने और निर्दोष लोगों को फंसाने का आरोप लगाया है. इसके अलावा CPN-UML ने सरकार से देश में भ्रष्टाचार के दूसरे मामलों की जांच की भी मांग की है जैसे कि अतीत में माओवादी लड़ाकों के द्वारा करोड़ों रुपये की हेराफेरी से जुड़ा मामला. 

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अलावा सिविल सोसायटी के सदस्यों और नेपाल के आम लोगों की तरफ़ से बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार के लिए इस घोटाले को नज़रअंदाज़ करना इतना आसान नहीं होगा. 

नेपाल पुलिस के द्वारा फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले की छानबीन के दौरान 16 हाई-प्रोफाइल लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें पूर्व गृह मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण खांड; CPN-UML के सचिव और पूर्व उप प्रधानमंत्री तोप बहादुर रायमाझी; पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडेय; नेपाली कांग्रेस के नेता और सांसद अंगतवा शेरपा; भूटानी मानव अधिकार कार्यकर्ता और भूटानी शरणार्थियों के मशहूर लोकतांत्रिक नेता टेक नाथ रिजाल और नेपाल हज कमेटी के अध्यक्ष शमशेर मियां शामिल हैं. साथ ही नौ और लोगों के ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया गया है. नेपाल पुलिस आरोपियों के ख़िलाफ़ संगठित अपराध अधिनियम 2013 के तहत केस दायर कर सकती है. 

भले ही सरकार फ़र्ज़ी भूटानी शरणार्थी घोटाले की जांच के ज़रिए भ्रष्टाचार और अपराध के गठजोड़ को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध लग रही है लेकिन कुछ हलकों में इस बात को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि सरकार दोषियों को सज़ा दिलाने में कामयाब होगी. मगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अलावा सिविल सोसायटी के सदस्यों और नेपाल के आम लोगों की तरफ़ से बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार के लिए इस घोटाले को नज़रअंदाज़ करना इतना आसान नहीं होगा. अगर असली दोषियों को पकड़कर सरकार उन्हें क़ानून के मुताबिक़ सज़ा दिलाने में कामयाब होती है तो प्रधानमंत्री दहल की विश्वसनीयता में और ज़्यादा बढ़ोतरी होगी.

The views expressed above belong to the author(s). ORF research and analyses now available on Telegram! Click here to access our curated content — blogs, longforms and interviews.