नेपाल और भारत के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और विविध अन्य क्षेत्रों में जो सामंज्य है, उसकी तुलना में कोई भी दो देशों के बीच इतने गहरे रिश्ते नहीं हैं. इस तरह के सम्बन्धों के कारण, भारत द्वारा नेपाल के विकास के लिए दी गई उल्लेखनीय सहायता, एक उदाहरण पेश करती है. यह नज़ारा हाल ही में, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के 31 मई से 3 जून तक की भारत यात्रा के दौरान भी देखी गई थी. इस दौरान, नेपाल और भारत के बीच कई अहम समझौते हुए हैं. दोनो देशों ने ऐतिहासिक नेपाल-भारत ट्रांजिट समझौते का नवीनीकरण किया, साथ ही माल के परिवहन के लिए जलमार्ग के उपयोग के लिए भी समझौता किया. इसके अलावा, भारत ने नेपाल को आगामी 10 वर्षों में अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पादित होने वाली 10,000 मेगावॉट विद्युत भारत को निर्यात करने की अनुमति दी. इतना ही नहीं भारत ने नेपाल का सहयोग/समर्थन करने के लिए विशेष रूप से अपनी क्षमता से आगे बढ़कर, पहले चरण में बांग्लादेश को 50 मेगावॉट तक विद्युत निर्यात करने की अनुमति देकर नेपाल का उत्साहवर्धन किया. इससे नेपाल ने पहली बार भारत के बाहर विद्युत आपूर्ति के लिए अपना बाज़ार सुरक्षित किया.
भारत ने नेपाल का सहयोग/समर्थन करने के लिए विशेष रूप से अपनी क्षमता से आगे बढ़कर, पहले चरण में बांग्लादेश को 50 मेगावॉट तक विद्युत निर्यात करने की अनुमति देकर नेपाल का उत्साहवर्धन किया.
समान रूप से, भारत के सिलीगुड़ी और नेपाल के काकरभिट्टा के बीच और दूसरा नेपाल के मध्यीय विकास क्षेत्र में अमलेखगंज-चितवन के बीच – नेपाल और भारत के बीच दो तेल पाइपलाइनों के निर्माण के लिए समझौता भी काफी महत्वपूर्ण था. इसके अलावा, दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच और अधिक समन्वय स्थापित करने के लिए सीमांत डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुविधाजनक बनाने के लिए भी एक समझौता किया गया था.
भारत के नेपाल से आगामी 10 वर्षों में 10,000 मेगावॉट विद्युत खरीदने की प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच विद्युत व्यापार में एक बड़ी उपलब्धि है. इससे न केवल नेपाल के अतिरिक्त विद्युत को भारत में ही, दीर्घकालिक आधार पर बाज़ार की गारंटी सुनिश्चित हुई है, बल्कि इसने नेपाल में विद्युत क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश के लिए भी विशाल संभावनाएं पैदा की हैं.
भारतीय निजी क्षेत्र के लिए नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र में निवेश के लिए संभावनाएं और भी बढ़ गई हैं. यह इसलिए है क्योंकि भारत ने बिल्कुल ही स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे विद्युत परियोजनाओं से विद्युत नहीं खरीदेगा, जो नेपाल के नागरिकों से इतर ऐसी किसी तीसरे देश द्वारा सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संचालित, वित्तपोषित, या लाभान्वित किए जाते हैं, और जिनके साथ, भारत के विद्युत क्षेत्र में किसी प्रकार का द्विपक्षीय समझौता नहीं है. भारत, नेपाल के साथ 10,000 मेगावॉट विद्युत समझौते के तहत ऐसे किसी विद्युत परियोजना में शामिल नहीं होगा, जिसमें चीनी या पाकिस्तानी कंपनियों की किसी भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में सहभागिता होगी. इस आधार पर, हाल ही में भारत ने नेपाल की प्रस्तावित 456 मेगावॉट अपर तामाकोशी से बिजली आपूर्ति के आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि इस परियोजना में चीनी ठेकेदारों की सहभागिता थी.
हालांकि, भारत को 10,000 मेगावॉट की विद्युत आपूर्ति करने के लिए नेपाल को अगले 10 वर्षों में कम से कम 15,000 मेगावॉट की विद्युत उत्पादन करने की आवश्यकता है, क्योंकि घरेलू बाजार में इसकी खपत होनी है और बांग्लादेश रूपी विदेशी बाजार में आगामी समय में अतिरिक्त विद्युत की आपूर्ति की आवश्यकता होगी.
दोनों देशों के बीच बढ़ता विश्वास
भारत को विद्युत आपूर्ति करने के प्रयास के तौर पर, नेपाल अपने घरेलू ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को मज़बूत करने और सीमांतर में विद्युत लाइन बिछाने में लिए मेहनत कर रहा है. इसके लिए, नेपाल और भारत मिलकर, उच्च क्षमता वाले सीमांतर विद्युत लाइन को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं, जैसे कि सीमांतर में, 2000 मेगावाट क्षमता वाली ढलकेबार-सीतामढ़ी पॉवर लाइन. बुटवल (नेपाल)-गोरखपुर (भारत) सीमांतर ट्रांसमिशन लाइन पर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने की संभावना है. नेपाल और भारत ने 400 किलोवोल्ट क्षमता वाली इनारुवा (नेपाल)-पूर्णिया (भारत) विद्युत प्रसारण लाइन का विकास करने के लिए सहमति जताई है, साथ ही 400 किलोवोल्ट वाली न्यू लमकी (नेपाल)-बरेली (भारत) विद्युत प्रसारण लाइन का विकास भी हुआ है. 2028-29 तक ये सीमांतर लाइनों के पूर्ण हो जाएं, तो नेपाल भारत को लगभग 9,000 मेगावॉट की विद्युत आपूर्ति करने की स्थिति में होगी.
भारत को विद्युत आपूर्ति करने के प्रयास के तौर पर, नेपाल अपने घरेलू ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क को मज़बूत करने और सीमांतर में विद्युत लाइन बिछाने में लिए मेहनत कर रहा है.
नेपाल के विद्युत क्षेत्र में तेज़ी हाल फिलहाल ही आयी है. हालांकि, इस देश के पास 42.000 मेगावाट की क्षमता वाली हाइड्रोपॉवर का उत्पादन करने की अपार क्षमता होने के बावजूद, अतीत में, इसके विकास के ख़ातिर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया. इसलिए 2008-09 के दौरान, नेपाल में रोज़ 18 घंटे तक बिजली में कटौती हुआ करती थी. पर मई 2018 आते आते, जब देश के भीतर 1.000 मेगावाट पॉवर का उत्पादन होने लगा, तब जाकर नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने लोड शेडिंग को खत्म करने का एलान किया. 2021 तक, खासकर के बारिश के मौसम में, देश अपनी ज़रूरत से अधिक विद्युत उत्पादन करने लगी. अब तक, देश लगभग 2.700 मेगावाट विद्युत उत्पादित करती है, जो वर्तमान आर्थिक वर्ष 2022-23 के अंत तक, बढ़कर 2.853 मेगावाट होने की संभावना है.
नेपाल और भारत के बीच हुए वर्तमान विद्युत समझौते के अंतर्गत नेपाल के भारत के ऊपर निर्भरता लगभग उसी दर से बढ़ने वाले हैं जिस दर से भारत का नेपाल के ऊपर. दोनों देशों के बीच इस आर्थिक संघटन का अभिवृद्धि होना दोनों देशों के लिए उपयोगी है. ये वाकई उत्साहवर्धक है कि हालिया वर्षों में भारत को नेपाल के हाइड्रोपॉवर सेक्टर में काम करने की खुली स्वच्छंदता प्रदान की गई है. पूर्व में भी अगर ऐसी ही मंशा होती तो, नेपाल अब तक एशिया में एक आर्थिक रूप से सक्षम देश के तौर पर उभर चुका होता. नेपाल को यह अनुभूति हो गई है कि भारत के सहयोग के बिना अपने जलविद्युत को विकसित नहीं कर सकता, और उनकी राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद वह भारत के साथ इस मुद्दे पर काम करने के लिए उत्साही है, यह एक बड़ी उपलब्धि है.
देश में बढ़ती विद्युत उत्पादन की वजह से कृषि, उद्योग, परिवहन, और अन्य सेक्टर, जैसे विकास के क्षेत्रों में एक गुणक का प्रभाव होगा.
अब नेपाल के लिए दक्षिण एशिया के क्षेत्र में, उभरते हुए सकारात्मक आर्थिक बल की संभावनाएं विशाल रूप से बढ़ गई हैं, चूंकि बांग्लादेश के अलावा, भारत को बेचे जाने वाली अतिरिक्त विद्युत, का देश की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने की काफी संभावना है. इससे भारत और अन्य देशों के साथ व्यापार घाटे को भी कम करने में मदद मिल सकती है. देश में बढ़ती विद्युत उत्पादन की वजह से कृषि, उद्योग, परिवहन, और अन्य सेक्टर, जैसे विकास के क्षेत्रों में एक गुणक का प्रभाव होगा. हालांकि, नेपाल के जलविद्युत के विकास के लिए नेपाल और भारत के बीच बढ़ते विश्वास के इस वातावरण को कुछ तत्वों से भी खतरा हो सकता है. इसलिए, नेपाल के सभी राष्ट्रवादी शक्तियों को मिलकर ज़िम्मेदारीपूर्वक काम करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि, नेपाल-भारत विद्युत क्षेत्र में सहयोग अविरत जारी रहता है.
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