Author : Chaitanya Giri

Expert Speak Raisina Debates
Published on Apr 04, 2025 Updated 0 Hours ago

महाराष्ट्र का प्रस्तावित स्मार्ट शहर नैना चीन के गुइयांग से सबक ले सकता है और भारत की विज्ञान डाटा राजधानी के रूप में उभर सकता है.

महाराष्ट्र का NAINA बनेगा विज्ञान और डेटा का केंद्र

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नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का काम पूरा होने और उसके जल्द चालू होने की उम्मीद, साथ ही एक नए मेगा-स्मार्ट शहरनैना’ (NAINA) की शुरुआत के साथ महाराष्ट्र सरकार तेज़ी से आगे बढ़ रही है. नैना, नवी मुंबई एयरपोर्ट इंफ्लूएंस नोटिफाइड एरिया का संक्षिप्त नाम है, जिसे नए ज़माने के उद्योगों के लिए बनाया जा रहा है. इसको बनाने का मुख्य मक़सद बड़े डाटा और डाटा से जुड़े उद्योगों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना है. महाराष्ट्र सरकार की नई ग्रीन इंटीग्रेटेड डाटा सेंटर पार्क नीति के बाद, नैना और इसके आस-पास के मुंबई के इलाकों (MMR) में फिलहाल लगभग 1.5 गीगावाट (GW) स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी सूचना प्रौद्योगिकी और डाटा क्षमता को विकसित करने का अनुमान है. इससे राज्य में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश सकता है, जो भारत में आने वाले निवेश का लगभग आधा हिस्सा है. इसके अलावा भारत के डाटा सेंटर बाजार के साल 2029 तक लगभग 14 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की भी उम्मीद है.

NAINA की भूमिका

नैना में जो मेगा-स्केल और हाइपर-स्केल डाटा सेंटर प्रस्तावित हैं, उनको व्यावसायिक रूप से बहुमूल्य जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी AI) डाटा, ट्रांजेक्शनल डाटा और इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (IOT) बिग डाटा के बड़े केंद्र के रूप में बनाया जा सकता है. इसके अलावा, डिजिटल पब्लिक गुड्स स्टैक डाटा, इंडस्ट्रियल ऑपरेशंस बिग डाटा, आर्थिक डाटा और शासन सेवाओं के डाटा के केंद्र भी यहां होंगे. हालांकि, कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। मसलन, क्या नैना भारत के वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे की कमी को पूरा करेगा? क्या नैना स्वदेशी भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लाउड के माध्यम से भारत के अनुसंधान और विकास (R&D) प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले डाटा का भी संग्रह करेगा? हम चाहें, तो यहां चीन के गुइयांग प्रांत से कुछ सीख सकते हैं.

भारत के डाटा सेंटर बाजार के साल 2029 तक लगभग 14 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की भी उम्मीद है.

गुइयांग दरअसल 2010 के दशक की शुरुआत तक मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, जहां प्रति व्यक्ति आय तटवर्ती चीनी प्रांतों से कम थी. यहां भौगोलिक रूप से कई पहाड़ी गुफाएं हैं, जो डाटा सेंटर की गर्मी को सोखने करने के लिए उपयुक्त हैं. चीन की सरकार ने जल्द ही इसकी इस विशेषता को पहचान लिया और गुइयांग को चीन की बिग डाटा वैली के रूप में विकसित कर दिया. आज गुइयांग में 4,000 से अधिक डाटा सेंटर हैं, जिनमें टेनसेंट, चाइना टेलीकॉम, चाइना यूनिकॉम और हुआवेई के स्वामित्व वाले 20 से अधिक बड़े हाइपर-स्केल डाटा सेंटर शामिल हैं. हालांकि, गुइयांग केवल एक वाणिज्यिक डाटा सेंटर नहीं है. यह चीन की वैज्ञानिक तरक्क़ी से भी जुड़ा हुआ है.

गुइयांग की अनूठी भौगोलिक स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए इसे खगोलविदों के लिए वैश्विक केंद्र बनाया गया और यहां दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-डिश फाइव हंड्रेड मीटर अपर्चर टेलीस्कोप (FAST) स्थापित किया गया. FAST की स्थापना के बाद चीन ने अमेरिका से रेडियो खगोल विज्ञान का वैश्विक नेता होने का ख़िताब छीन लिया, क्योंकि अमेरिका ने प्यूर्टो रिको में अरेसिबो वेधशाला को फिर से खड़ा करने में उत्सुकता नहीं दिखाई, जिस कारण यह ढहते-ढहते साल 2022 में पूरी तरह से खत्म हो गई. हालांकि, प्यूर्टो रिको में कभी डाटा केंद्र नहीं बनाया गया और साल 1980 से 2000 के बीच, जब यह अपने शीर्ष पर था, तब भी यहां डाटा को रणनीतिक रूप से प्राथमिकता नहीं दी गई. चीन ने गुइयांग में अपने खगोल विज्ञान को क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा भंडारण क्षमताओं के साथ जोड़ा. हालांकि, अमेरिकी वैज्ञानिक FAST को चीन की सॉफ्ट पावरका प्रमुख स्तंभ मानते हैं, लेकिन असल में चीन इससेहार्ड पावरहासिल करना चाहता है. गुइयांग चीन की तुलनात्मक रूप से कम चर्चित रणनीतिक संपत्ति है. यह चाइना साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी क्लाउड का डाटा-स्टोरेज केंद्र है. उल्लेखनीय है कि इस क्लाउड को चाइनीज अकादमी ऑफ साइंस संचालित करता है और यह स्टेट काउंसिल के अंतर्गत एक उद्यम है.

चाइना साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी क्लाउड एक ऐसा मंच है, जिससे एक लाख से अधिक चीनी वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं. यहां वे वैज्ञानिक जानकारी, डाटा और साहित्य का संग्रह कर सकते हैं, फिर से उसे पा सकते हैं, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं और लेन-देन साझा कर सकते हैं. अभी इसके पास 315 पेटाफ्लॉप की कंप्यूटिंग क्षमता है, 150 पेटाबाइट की भंडारण क्षमता है, 400 से अधिक भिन्न-भिन्न शोध सॉफ्टवेयर को जोड़ने की क्षमता है और 22 से अधिक डाटा प्लेटफॉर्म है. यहां खगोल विज्ञान, भू-सूचना, उच्च-ऊर्जा भौतिकी, भौतिकी विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, माइक्रोबायोम, जीनोम, प्रोटेम, लिपिडोम, भूकंप विज्ञान, ध्रुवीय (आर्कटिक और अंटार्कटिक) डाटा, तिब्बती भूवैज्ञानिक विज्ञान, पारिस्थितिकी विज्ञान, समुद्री विज्ञान, मौसम विज्ञान, वानिकी और घास के मैदान, कृषि विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, पृथ्वी प्रणाली विज्ञान और गोबी रेगिस्तान क्रायोस्फीयर विज्ञान आदि से संबंधित डाटा केंद्र स्थापित हैं.

भारत सरकार को भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी डाटा क्लाउड के लिए हार्डवेयर पर अधिकार रखने के लिए एक सरकारी उद्यम स्थापित करना चाहिए. इसमें NAINA एक उन्नत हब हो सकता है, क्योंकि यह भारत की आगामी डाटा राजधानी के रूप में उभर रहा है.

भारत की NAINA परियोजना में कई स्तरों पर चीन से सबक लिया जा सकता है. सबसे पहले, NAINA को केवल वाणिज्यिक, लेनदेन और व्यक्तिगत डाटा के लिए, बल्कि भारत के वैज्ञानिक डाटा के लिए भी क्लाउड स्टोरेज हब बनाया जाना चाहिए. दूसरा, भारत भले ही अंतरराष्ट्रीय विज्ञान परिषद् की डाटा समिति (CODATA) का राष्ट्रीय सदस्य रहा है, लेकिन इसने अब तक यह नहीं समझा है कि CODATA के सदस्य देश चीन ने अपने विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्लाउड से किस तरह से फ़ायदा उठाया. भारत को भी इसी तरह का केंद्रीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए, ताकि निजी और सरकारी प्रयोगशालाओं का डाटा संग्रह किया जा सके. तीसरा, भारत सरकार को भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी डाटा क्लाउड के लिए हार्डवेयर पर अधिकार रखने के लिए एक सरकारी उद्यम स्थापित करना चाहिए. इसमें NAINA एक उन्नत हब हो सकता है, क्योंकि यह भारत की आगामी डाटा राजधानी के रूप में उभर रहा है.

आगे की राह

भारत सरकार अपने नव-स्थापित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से देश में शोध और विकास को आर्थिक मदद देने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का एक कोष बनाने जा रही है. 2025-26 के केंद्रीय बजट में इस कोष के लिए 14,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि शेष 36,000 करोड़ रुपये कॉरपोरेट और परोपकारी रास्तों से जुटाए जाने की उम्मीद है. इसके अलावा, ANRF के तहत 1,00,000 करोड़ रुपये का एक कोष अलग से बनाया जा रहा है, जिसके माध्यम से निजी क्षेत्र में शोध और विकास को बढ़ावा देने के लिए कम ब्याज दर पर और लंबी अवधि के कर्ज़ के माध्यम से आर्थिक मदद दी जाएगी. ANRF कोविकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए तैयार किया गया है और इसका मक़सद दुनिया भर में शोध और विकास में लगी संस्थाओं द्वारा अपनाए जा रहे सबसे बेहतर तरीकों को लागू करना है. अगर हमें इस मक़सद को हासिल करना है, तो शुरुआती मेगा परियोजनाओं में एक नैना प्रोजेक्ट को भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी डाटा क्लाउड बनाना चाहिए. ANRF द्वारा संचालित डाटा क्लाउड प्रभावी होगी, क्योंकि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं द्वारा तैयार शोध और विकास संबंधी निष्कर्षों को सुरक्षित रखने की ज़रूरत होगी. वैज्ञानिक डाटा भारत कीरणनीतिक डिजिटल संपत्तिऔर बहुमूल्य बौद्धिक संपदा है. इसके संग्रह और संप्रभुता को हमें सबसे अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए. स्पष्ट है, महाराष्ट्र के नैना को भारत के लिए विज्ञान डाटा राजधानी बनाना ही इस दिशा में हमारा अगला कदम होना चाहिए.


(चैतन्य गिरि ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सिक्योरिटी, स्ट्रैटिजी ऐंड टेक्नोलॉजी सेंटर में फेलो हैं)

 

 

 

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