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Published on Feb 25, 2025 Updated 2 Days ago

चीन की आतंकवाद निरोधक रणनीति का दायरा शिंजियांग में घरेलू नियंत्रण से बढ़ते हुए विदेशों में अपने हित सुरक्षित करने तक पहुंच गया है और इसके लिए चीन क्षेत्रीय ख़तरों का तालमेल आर्थिक और कूटनीतिक दांव से कर रहा है.

शिंजियांग से सीमांत तक: चीन की उभरती आतंकवाद निरोधक रणनीति

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उग्रवादी संगठनों से बढ़ते हुए ख़तरे के इस दौर में चीन की आतंकवाद से मुक़ाबला करने की रणनीति में भी काफ़ी बदलाव देखने को मिले हैं. इसकी फ़ौरी ज़रूरत का एक भयावह संकेत तब मिला, जब अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान में एक आत्मघाती बम हमले में चीन के दो कामगारों की मौत हो गई थी. इस घटना ने विदेशों में मूलभूत ढांचे की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में काम कर रहे चीनी नागरिकों के ऊपर मंडरा रहे ख़तरे को उजागर कर दिया था. ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए चीन और पाकिस्तान ने नवंबर- दिसंबर 2024 के दौरान वारियर-III के नाम से संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था और आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपने सहयोग को मज़बूती प्रदान की थी. ये युद्ध अभ्यास केवल सैन्य ताक़त का प्रदर्शन था, बल्कि तहरीक--तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते दबदबे से निपटने के लिए चला गया एक सामरिक दांव भी था. क्योंकि, TTP लगातार चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं में काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बना रहा है. आज जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है, तो ये आयाम निश्चित रूप से चीन के आतंकवाद से लड़ने के तौर-तरीक़ों पर असर डालते हैं और उसको मजबूर करते हैं कि वो घरेलू सुरक्षा के उपायों को मज़बूत करने, क्षेत्रीय कूटनीति को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय साझेदारियों की एक मिली जुली रणनीति को अपनाए.

आज जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है, तो ये आयाम निश्चित रूप से चीन के आतंकवाद से लड़ने के तौर-तरीक़ों पर असर डालते हैं और उसको मजबूर करते हैं कि वो घरेलू सुरक्षा के उपायों को मज़बूत करने, क्षेत्रीय कूटनीति को बढ़ावा देने और बहुपक्षीय साझेदारियों की एक मिली जुली रणनीति को अपनाए.

शिंजियांग में सुरक्षा का घरेलू मंज़र

आतंकवाद से लड़ने के चीन के तौर-तरीक़ों पर उसकी घरेलू नीतियों और ख़ास तौर से शिंजियांग में उसके रवैये का गहरा असर पड़ रहा है. क्योंकि, शिंजियांग में चीन की सरकार ने ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) और दूसरा वीगर उग्रवादी संगठनों से निपटने के लिए व्यापक रणनीतिक उपायों को लागू किया है. ETIM की स्थापना शिंजियांग के वीगर उग्रवादियों ने की है और इसका संबंध कई आतंकवादी गतिविधियों से पाया गया है. इनमें बमबारी, हत्याएं करना और सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों पर हमले की घटनाएं शामिल हैं. इन गतिविधियों ने शिंजियांग में अस्थिरता के हालत के चीनी नैरेटिव को ही मज़बूती दी है, जिसके तहत वो ये माहौल गढ़ता है कि पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मची हुई है.

इन ख़तरों से निपटने के लिए चीन ने शिंजियांग में कई सख़्त क़दम उठाए हैं. ख़ास तौर से आम नागरिकों की बड़े पैमाने पर निगरानी और पुलिस की सख़्ती को बढ़ावा दिया गया है. शिंजियांग में आम नागरिकों के बर्ताव और आवाजाही पर नज़र रखने के लिए, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और बायोमेट्रिक डेटा जमा करने जैसी जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. निगरानी के इस व्यापक नेटवर्क को केवल आम लोगों पर नज़र रखने के लिए खड़ा किया गया था, बल्कि हिंसा भड़कने से पहले ही उग्रवाद के संकेतों की पहचान करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया गया. इससे पता चलता है कि सुरक्षा को लेकर चीन का रुख़, घटना के बाद क़दम उठाने के बजाय, घटनाओं को रोकने के लिए पहले ही क़दम उठाने पर ज़ोर देने वाला है. यही नहीं, वीगरों कोफिर से शिक्षित करनेके कार्यक्रमों का मक़सद उनमें वैचारिक परिवर्तन लाना है. ये उपाय सुरक्षा की व्यापक रूप-रेखा का अभिन्न अंग बन चुके हैं.

शिंजियांग में सुरक्षा मज़बूत करने के लिए जो क़दम उठाए गए हैं, वो मुख्य रूप से घरेलू चिंताएं दूर करने पर केंद्रित हैं. लेकिन, ये उपाय चीन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से लड़ने की व्यापक रणनीतियों के लिए भी मॉडल का काम करते हैं.

शिंजियांग में सुरक्षा मज़बूत करने के लिए जो क़दम उठाए गए हैं, वो मुख्य रूप से घरेलू चिंताएं दूर करने पर केंद्रित हैं. लेकिन, ये उपाय चीन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से लड़ने की व्यापक रणनीतियों के लिए भी मॉडल का काम करते हैं. फेशियल रिकॉग्निशन और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करके चीन सुरक्षा का एक व्यापक ढांचा बनाने का प्रयास कर रहा है, जो ख़तरों का पहले ही पता लगाकर उनका ख़ात्मा कर सकें. हिंसा होने से पहले ही कार्रवाई करने पर चीन के ज़ोर देने के इस रवैये ने ही उसके उभरते ख़तरों से निपटने के क़दमों को राह दिखाई है. इससे पता चलता है कि आतंकवाद से निपटने की चीन की घरेलू रणनीतियां उसकी व्यापक भू-राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर रही हैं.

पाकिस्तान में चीन के लिए बढ़ते ख़तरे

पड़ोसी इलाक़ों में तहरीक--तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूहों के फिर से ताक़तवर होने से चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के लिए सीधा ख़तरा पैदा हो गया है. आज जब चीन, पाकिस्तान में अपना आर्थिक निवेश बढ़ा रहा है, ख़ास तौर से पूरे इलाक़े में वो बड़े पैमाने पर मूलभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं का विकास कर रहा है. ऐसे में इन निवेशों की सुरक्षा चीन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. सरकार के ख़िलाफ़ अपने वैचारिक विरोध और दूसरे देशों द्वारा स्थानीय संसाधनों के दोहन को लेकर बढ़ती नाराज़गी की वजह से तहरीक--तालिबान पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं में काम कर रहे चीनी नागरिकों को निशाना बनाने की मुहिम तेज़ कर दी है. इसकी वजह से चीन के लिए सुरक्षा का सिरदर्द बढ़ गया है. TTP के साथ साथ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे दूसरे हथियारबंद उग्रवादी संगठनों ने भी चीन के नागरिकों पर हमले की ज़िम्मेदारी ली है. उनका आरोप है कि चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC की परियोजनाओं ने स्थानीय बलोच समुदायों को हाशिए पर धकेल दिया है और उनके क्षेत्रीय संसाधनों का दोहन किया है. नीचे की सारणी में पाकिस्तान में चीन के नागरिकों पर हुए बड़े हमलों का ब्यौरा दिया गया है.

तारीख़

जगह

हमले की जानकारी

हमले की ज़िम्मेदारी किसने ली

कितने लोग मारे गए

14 जुलाई, 2021

दासू बांध, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा

चीन के नागरिकों को लेकर जा रही बस पर बमबारी

तहरीक--तालिबान पाकिस्तान

13

26 अप्रैल 2022

कराची

महिला आत्मघाती हमलावर ने एक स्कूल पर हमला किया, जिसमें तीन चीनी नागरिक मारे गए

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

3

26 मार्च 2024

बेशम, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा

चीनी नागरिकों को लेकर जा रही बस पर आत्मघाती हमला

तहरीक--तालिबान पाकिस्तान पर आरोप

6

7 अक्टूबर 2024

सिंध सूबा

चीनी कर्मचारियों के काफ़िले पर हमला

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

2

स्रोत: लेखक का संकलन

इन घटनाओं ने चीन के साथ पाकिस्तान के संबंधों को उसकी आतंकवाद निरोधक रणनीति के साथ बड़ी गहराई से जोड़ दिया है. अब जबकि चीन के कामगारों पर हमले बढ़ रहे हैं, तो पाकिस्तान को भी आतंकवाद से लड़ने के अपने प्रयास तेज़ करने को मजबूर होना पड़ा है. पाकिस्तान को चीन के निवेशों की सुरक्षा के प्रोटोकॉल बेहतर बनाने और उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्य संसाधन झोंकने के लिए बाध्य होना पड़ा है. 2022 से 2023 के दौरान चीन के नागरिकों पर पाकिस्तान में हो रहे हमलों में दो तिहाई का इज़ाफ़ा हुआ. इसके जवाब में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने आतंकवाद से लड़ने की नई रणनीति का ऐलान किया, जिसमें नए सैन्य अभियान शुरू करने के बजाय खुफिया जानकारी पर आधारित मौजूदा अभियानों को मज़बूत करने पर बल दिया गया. ये तरीक़ा केवल शिंजियांग में चीन की अपनी रणनीति से मिलता जुलता है, बल्कि पाकिस्तान के मौजूदा सियासी हालात का आईना भी है. क्योंकि पाकिस्तान अंदरूनी संघर्ष के लंबे दौर के बाद सैन्य बलों पर आम लोगों का भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रहा है.

तालिबान का प्रशासन: एक दुधारी तलवार?

पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हाल के दिनों में बढ़े तनाव से आतंकवाद से लड़ने के चीन के प्रयासों को और जटिल बना दिया है. 2021 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान, अफ़ग़ान सीमा से हमले कर रहे तहरीक--तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में अनिच्छा का संकेत दे रहा है. इस बात ने चीन को एक नाज़ुक स्थिति में ला खड़ा किया है, जिसके तहत वो अपने सामरिक हितों के लिए नुक़सानदेह बनने वाले सुरक्षा संबंधी ख़तरों से निपटने के साथ साथ इस इलाक़े में अपने कूटनीतिक संबंधों को भी संतुलित बनाए रखना चाह रहा है.

चीन ने तालिबान के ऊपर अपने आर्थिक दबदबे का लाभ उठाने की कोशिश की है. ख़ास तौर से बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) जैसी योजनाओं के ज़रिए, जिनका मक़सद अफ़ग़ानिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों की विशाल संपदा का फ़ायदा उठाना है. खनन से लेकर मूलभूत ढांचे तक में चीन का पूंजी निवेश केवल ख़ुद चीन के लिए अहम है, बल्कि तालिबान के लिए भी ज़रूरी है. क्योंकि, तालिबान असरदार तरीक़े से शासन करने की अपनी क्षमता को साबित करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मान्यता हासिल करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, आर्थिक प्रोत्साहनों के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान में चीन की रणनीति का मुख्य बिंदु उसके रक्षात्मक हितों से प्रेरित है. निवेश के अवसर मुहैया कराकर चीन उम्मीद कर रहा है कि वो तालिबान को तहरीक--तालिबान पाकिस्तान जैसे संगठनों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित कर सकेगा, और इस तरह अपनी ज़रूरतों का संरक्षण कर सकेगा.

चीन का सुरक्षा पर इतना ज़ोर देना उसके लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वो अपनी सरहदों के इर्द गिर्द बढ़ती असुरक्षा के बीच अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है. पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हाल के दिनों में सैन्य संघर्ष देखने को मिला है, जिसमें पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के भीतर TTP के ठिकानों पर हवाई हमले भी किए थे. तालिबान ने पाकिस्तान की इस सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया था और इल्ज़ाम लगाया था कि उसके हमलों से अफ़ग़ानिस्तान के आम नागरिकों की मौत हो गई है. आज जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं, तो इससे अपने निवेशों की स्थिरता को लेकर चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं, ख़ास तौर से जब बढ़ती हिंसक घटनाओं ने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे जैसी अहम परियोजना के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है. यही नहीं, अगर अफ़ग़ानिस्तान आतंकवादी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता है, और इस क्षेत्र की अस्थिरता में इज़ाफ़ा होता है तो चीन के सामरिक हितों पर भी जोखिम बढ़ जाएगा.

भविष्य के लिए चीन की दोहरी रणनीति

आतंकवाद से लड़ने के लिए चीन की रणनीति के उभरते आयाम और ख़ास तौर से ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIN) और तहरीक--तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ख़तरों ने चीन के सामने खड़ी घरेलू और क्षेत्रीय सुरक्षा की जटिल चुनौतियों को ही रेखांकित किया है. अमेरिका द्वारा ETIM को आतंकवादी संगठनों की फ़ेहरिस्त से हटाने के बाद से चीन और चौकस हो गया है और संभावित ख़तरों को लेकर उसका रवैया और भी सख़्त हो गया है. घरेलू स्तर पर शिंजियांग में चीन के कड़े क़दम आतंकवाद को लेकर उसकी व्यापक रणनीति को ही दिखाते हैं, जो अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान को लेकर चीन की रणनीति पर भी असर दिखा रहे हैं. तालिबान ने वैसे तो ये प्रतिबद्धता दोहराई है कि उसके लिए अपनी सरहद के भीतर किसी अलगाववादी आतंकवादी को पनाह लेने से रोकना महत्वपूर्ण है. लेकिन, तालिबान हुकूमत के कमज़ोर और टुकड़ों में बंटे दबदबे और तमाम आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी ने तालिबान की हैसियत को काफ़ी कमज़ोर कर दिया है. यही नहीं अंदरूनी टकराव और सीमित संसाधनों की वजह से भी तालिबान आतंकवादी संगठनों से निपट पाने में कमज़ोर साबित हो रहा है. इससे वो आतंकवादी गतिविधियों को केंद्रीकृत तरीक़े से नियंत्रित नहीं कर पा रहा है.

आज जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं, तो इससे अपने निवेशों की स्थिरता को लेकर चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं, ख़ास तौर से जब बढ़ती हिंसक घटनाओं ने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे जैसी अहम परियोजना के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है.

आज जब TTP की बढ़ती गतिविधियों और पाकिस्तान के जवाबी हमलों की वजह से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है, तो एक मध्यस्थ के तौर पर चीन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. इससे उसके लिए ऐसी बहुआयामी और परिवर्तनशील रणनीतियां अपनाने की ज़रूरत रेखांकित होती है जो सुरक्षा की चिंताओं और भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बिठा सकें. ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से आतंकवाद से निपटने को लेकर चीन और अमेरिका के बीच चल रही प्रतिद्वंदिता ही क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के आयामों को आकार देगी. आगे चलकर चीन की आतंकवाद निरोधक रणनीतियां लगातार बदलते रहने की संभावना है. आज जब चीन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के भविष्य को आकार देने में अहम खिलाड़ी बनने का प्रयास कर रहा है, तो वो सुरक्षा की फ़ौरी ज़रूरतों का तालमेल अपनी दूरगामी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं से मिलाने की कोशिशें जारी रखेगा.

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