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हिंद महासागर से थाईलैंड की नज़दीकी और पूर्वी अंडमान सागर, जो प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध क्षेत्र हैं, में बंगाल की खाड़ी से थाईलैंड के संपर्क ने पारंपरिक रूप से उसके समुद्री दृष्टिकोण को प्रभावित किया है. लेकिन खाड़ी में भू-राजनीतिक तनाव उभरने के साथ सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी इस दृष्टिकोण को तय करने में महत्वपूर्ण होती जा रही हैं, विशेष रूप से उसकी एक्ट वेस्ट नीति (AWP) के संबंध में जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक परिवर्तनों के द्वारा लाए गए अवसरों का लाभ उठाना है. इसलिए थाईलैंड ने एक अलग रवैया अपनाया है जिसका मक़सद सुरक्षा और आर्थिक लक्ष्यों के बीच संघर्ष को देखते हुए अपनी सामरिक जगह और आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संघ) के अनुभव का उपयोग करके स्थिरता और साझा समृद्धि है. इस रणनीति का मक़सद दोनों मोर्चों पर थाईलैंड के असर को बढ़ाना और देश को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा हितधारक के रूप में स्थापित करना है.
इस रणनीति का मक़सद दोनों मोर्चों पर थाईलैंड के असर को बढ़ाना और देश को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा हितधारक के रूप में स्थापित करना है.
खाड़ी का आर्थिक समुद्र
बंगाल की खाड़ी की आर्थिक क्षमता व्यापार तक ही सीमित नहीं है; इसमें नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) भी शामिल है जिसका विशाल संसाधन इस क्षेत्र में है और जो देश की 25 प्रतिशत जनसंख्या को सहारा देता है, साथ ही थाईलैंड के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक-तिहाई योगदान देता है. मछली पालन और एक्वाकल्चर आवश्यक क्षेत्र हैं जो खाद्य सुरक्षा और रोज़गार के अवसर प्रदान करते हैं. इसके अलावा समुद्री पर्यटन हर साल लाखों लोगों को आकर्षित करता है. ब्लू इकोनॉमी की क्षमता को पहचानते हुए थाईलैंड ने क्षेत्रीय सहयोग के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संस्थानों की तरफ रुख किया.
बंगाल की खाड़ी थाईलैंड के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार कॉरिडोर है जो अहम आर्थिक अवसर पेश करता है. समुद्र के इस महत्वपूर्ण हिस्से की सीमा से लगे छह तटीय देशों में से एक के रूप में थाईलैंड अपने पड़ोसी देशों जैसे कि बांग्लादेश, म्यांमार और भारत के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार है. बहुपक्षीय पहल में थाईलैंड के प्रयासों को उन परियोजनाओं से सहायता मिलती है जो बंगाल की खाड़ी में उसकी रणनीतिक स्थिति मज़बूत करती हैं. थाईलैंड और बांग्लादेश, थाईलैंड में रनोंग बंदरगाह और बांग्लादेश में चटगांव बंदरगाह के बीच एक सीधी शिपिंग लाइन स्थापित करना चाहते हैं. इसके साथ-साथ भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे- जो कि तीनों तटीय देशों के बीच भारत के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे की एक परियोजना है- में थाईलैंड की हिस्सेदारी इस क्षेत्र के लिए थाईलैंड के उत्साह को दिखाता है. बंदरगाहों का एक-दूसरे से संपर्क और त्रिपक्षीय हाईवे द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय संबंधों को लाभ पहुंचाते हैं और भूटान, नेपाल एवं भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ थाईलैंड की भागीदारी के लिए रणनीतिक फायदा मुहैया कराते हैं. ये भागीदारी थाईलैंड को सस्ते परिवहन के माध्यम से अपने बाज़ार की पहुंच में सुधार करने और अपने व्यापार की मात्रा बढ़ाने की अनुमति देती है. अपने द्विपक्षीयवाद के अलावा थाईलैंड ने इस क्षेत्र में बहुपक्षवाद की ओर भी रुख किया है, विशेष रूप से बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की ओर. ये क्षेत्रीय आर्थिक संस्थान तेज़ी से बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के क्षेत्र की ब्लू इकोनॉमी और समुद्री संपर्क से जुड़ी पहल को निर्धारित कर रहे हैं. बहुपक्षवाद को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप थाईलैंड ने BIMSTEC के भीतर नेतृत्व की एक भूमिका संभाली है ताकि संस्थानों के तालमेल को बढ़ाया जा सके और इसे एक ठोस संगठन बनाया जा सकें.
बहुपक्षवाद को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप थाईलैंड ने BIMSTEC के भीतर नेतृत्व की एक भूमिका संभाली है ताकि संस्थानों के तालमेल को बढ़ाया जा सके और इसे एक ठोस संगठन बनाया जा सकें.
BIMSTEC को मज़बूत करके उसका लक्ष्य इस संगठन को एक अधिक एकजुट समूह में बदलना है जो क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ाए क्योंकि बंगाल की खाड़ी सबसे कम एकीकृत भू-राजनीतिक क्षेत्रों में से एक बनी हुई है जहां क्षेत्र के भीतर व्यापार आसियान जैसे क्षेत्रों की तुलना में कम है. अपनी एक्ट वेस्ट नीति (AWP) के अनुरूप अपने पहले के प्रयासों को जारी रखते हुए और BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में थाईलैंड ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को 14 से सात क्षेत्रों में सुव्यवस्थित करने में मदद की है- कृषि, कनेक्टिविटी, पर्यावरण, व्यापार, सुरक्षा, विज्ञान एवं तकनीक और लोगों के स्तर पर संपर्क. इस प्रयास में थाईलैंड के आसियान वाले समृद्ध अनुभव ने BIMSTEC जैसे समूह की मदद की है. इसके अलावा आसियान के सदस्य के रूप में उसने मास्टर प्लान आसियान कनेक्टिविटी 2025 और आसियान एकीकरण के लिए पहल जैसे प्रयासों से मिली सीख को BIMSTEC परिवहन कनेक्टिविटी को तैयार करने में लगाया है. इसी तरह IORA में थाईलैंड ने एक “सक्रिय” भूमिका निभाई है और “स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के आदान-प्रदान, छोटे एवं मध्यम उद्योग को बढ़ावा और अवैध, असूचित एवं अनियमित मछली पकड़ने का मुकाबला करने” में मदद की है.
इन महत्वाकांक्षी पहल के बावजूद थाईलैंड के योगदानकर्ता महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करते हैं जैसे कि हितधारकों के बीच सीमित जागरूकता, अपर्याप्त निगरानी और नियामक समर्थन की कमी जिससे घरेलू और विदेशी- दोनों तरह के निवेशकों के लिए अनिश्चितता तैयार होती है. थाईलैंड ने स्थिरता ऋण और ब्लू बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपने प्राइवेट सेक्टर के निवेश को जुटाया है. उसने पर्यावरण की रक्षा के साथ आर्थिक गतिविधियों को संतुलित करने के लिए समुद्री स्थानिक योजना (मरीन स्पैटियल प्लानिंग या MSP) को भी लागू किया है और ज़रूरत से ज़्यादा मछली पकड़ने, जलवायु परिवर्तन एवं प्रदूषण से निपटने के लिए बे ऑफ बंगाल लार्ज मरीन इकोसिस्टम प्रोजेक्ट फेज II (BOBLME II) जैसी पहल में हिस्सा लिया है.
क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा
वैसे तो बंगाल की खाड़ी के सामरिक महत्व के पीछे की आर्थिक दलील को कम करके नहीं आंका जा सकता है लेकिन इस क्षेत्र की सुरक्षा भी थाईलैंड के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है. ये सुरक्षा अनिवार्यताएं दो महत्वपूर्ण बिंदु दर्शाती हैं: थाईलैंड के AWP सुरक्षा स्तंभ का बढ़ता दावा और बड़े पैमाने पर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा संरचना को तय करने में इस क्षेत्र का बढ़ता महत्व. बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा की तरफ रुख चीन की स्पष्ट, बढ़ती मौजूदगी और असर, जिसने अटकलों को गंभीर चिंता में बदल दिया है, के कारण लगातार क्षेत्रीय परिवर्तन का हिस्सा है. हालांकि थाईलैंड का नज़रिया दूसरे से अलग है. वैसे तो उसने सुरक्षा चुनौतियों को स्वीकार किया है और साझा रक्षा अभ्यासों (जैसा कि टेबल 1 में दिखाया गया है) एवं समुद्री क्षेत्र में जागरूकता सहयोग के माध्यम से भारत जैसे क्षेत्रीय देशों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल किया है लेकिन उसने ये सब टकराव की स्थिति अपनाए बिना किया है. इसके अलावा उसने समुद्री सहयोग के ज़रिए ब्लू इकोनॉमी के महत्व पर ज़ोर दिया है.
टेबल 1: थाईलैंड और अन्य देशों के बीच समुद्री अभ्यास:

स्रोत: लेखक के द्वारा संकलित
समुद्री सहयोग के कुछ उदाहरणों में भारत-थाईलैंड कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (CORPAT)- दो साल पर होने वाली एक पहल जिसमें भारत और रॉयल थाई नौसेना शामिल हैं और जिसकी शुरुआत 2005 में हुई थी- जैसे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास शामिल हैं. ये साझा अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के उदाहरण हैं और सहयोगात्मक समुद्री व्यवस्था के महत्व पर ज़ोर देते हैं. इस तरह भारत की एक्ट ईस्ट नीति और थाईलैंड की एक्ट वेस्ट नीति के बीच बढ़ते तालमेल को और अधिक उजागर करते हैं. भारत के अलावा थाईलैंड ने भी इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ अपना नौसैनिक सहयोग बढ़ाया है.
द्विपक्षीय सहयोग के अलावा थाईलैंड ख़ुद को कुछ अन्य के साथ-साथ इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (IONS) और इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI) जैसी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और रक्षा बहुपक्षीय संस्थानों के साथ भी जोड़ रहा है. IONS के अध्यक्ष और ऑस्ट्रेलिया के साथ IPOI के समुद्री पारिस्थितिकी स्तंभ (मेरिटाइम इकोलॉजी पिलर) के सह-अध्यक्ष के रूप में थाईलैंड ने एकजुट समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए कदम उठाए हैं. अपनी IONS अध्यक्षता के तहत उसने समुद्री डकैती, अवैध रूप से मछली पकड़ने और तस्करी समेत क्षेत्रीय चुनौतियों को हल करने के लिए सहयोगात्मक रणनीतियां विकसित की और उसने “समुद्री संसाधनों के प्रभावी एवं टिकाऊ उपयोग और कुशल एवं लाभकारी साझा समुद्री क्षेत्र के प्रबंधन” का समर्थन करने में ब्लू इकोनॉमी के महत्व को उजागर किया है.
द्विपक्षीय सहयोग के अलावा थाईलैंड ख़ुद को कुछ अन्य के साथ-साथ इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (IONS) और इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI) जैसी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और रक्षा बहुपक्षीय संस्थानों के साथ भी जोड़ रहा है.
इन प्रयासों के माध्यम से थाईलैंड IONS की सामूहिक मज़बूती में योगदान देता है और इन मुद्दों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय क्षमताओं को बढ़ाता है. इस तरह पर्यावरण को नुकसान और तस्करी जैसे सुरक्षा ख़तरों से निपटने के लिए एक एकीकृत प्रतिक्रिया का तंत्र तैयार करता है. ये प्रयास थाईलैंड के अनूठे समुद्री दृष्टिकोण को उजागर करते हैं जो सहकारी ढांचे के माध्यम से राष्ट्रीय सामर्थ्य और बंगाल की खाड़ी एवं हिंद महासागर को शामिल करने वाले एक एकीकृत एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के दृष्टिकोण पर ज़ोर देते हैं. इस तरह ये सभी घटनाक्रम दिखाते हैं कि सुरक्षा से जुड़ी सोच धीरे-धीरे आर्थिक हितों के साथ तालमेल बिठा रही है. इन प्रयासों के ज़रिए समुद्री क्षेत्र में आर्थिक और सुरक्षा हितों के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर ज़ोर दिया गया है, न कि किसी एक के लिए दूसरे के साथ समझौता करने पर.
थाईलैंड का तरीका: एक अलग दृष्टिकोण को बढ़ावा
सक्रिय पहल और अच्छी तरह से तैयार रणनीतियों के माध्यम से थाईलैंड ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में ख़ुद को एक प्रमुख किरदार के रूप में प्रदर्शित किया है जो क्षेत्रीय व्यापार को मज़बूत करने, कनेक्टिविटी बढ़ाने एवं तटीय देशों के बीच ईमानदारी को अपनाने के लिए प्रयासों का नेतृत्व करता है और साझा चुनौतियों को हल करने एवं प्रभावी ढंग से सहयोग के लिए अपनी क्षमता को दिखाता है. अपनी नेतृत्व वाली भूमिका से आगे वो ख़ुद को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय किरदार के रूप में स्थापित करने के लिए भी ज़मीनी काम कर रहा है. ये दृष्टिकोण उसके असर की पुष्टि करता है और टिकाऊ साझेदारी को बढ़ावा देने, आर्थिक विकास को तेज़ करने और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने में उसकी प्रतिबद्धता को उजागर करता है. ये प्रयास लंबे समय में उसकी प्रमुखता को बरकरार करेंगे.
क्षेत्रीय सहयोग से जुड़ी पहल में थाईलैंड ने अपनी भागीदारी के माध्यम से आसियान के अपने अनुभव का लाभ उठाकर समुद्री सुरक्षा और आर्थिक लक्ष्यों को एकीकृत करने पर ध्यान दिया है. इस अनोखे दृष्टिकोण ने BIMSTEC, IPOI और IORA जैसे क्षेत्रीय संस्थानों को भी निर्धारित किया है जो बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में चुनौतियों का समाधान करने के लिए सामूहिक उपाय पर ज़ोर देते हैं. ये समुद्री क्षेत्र में अर्थशास्त्र और सुरक्षा के बीच सामंजस्य स्थापित करके इस अविकसित इलाके के भीतर एक अधिक एकीकृत भू-राजनीतिक ढांचा बनाने की थाईलैंड की आकांक्षा को उजागर करता है. इसलिए जब तक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिशीलता का विकसित होना जारी है, तब तक अपने नज़दीकी समुद्री क्षेत्र में थाईलैंड का रणनीतिक दृष्टिकोण प्रभावी ढंग से आर्थिक अवसरों का सामना करने और सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा.
जब तक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिशीलता का विकसित होना जारी है, तब तक अपने नज़दीकी समुद्री क्षेत्र में थाईलैंड का रणनीतिक दृष्टिकोण प्रभावी ढंग से आर्थिक अवसरों का सामना करने और सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा.
थाईलैंड दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है. इसके लिए वो अपनी एक्ट वेस्ट नीति का पालन करते हुए आर्थिक पुल और समुद्री केंद्र के रूप में अपनी भूमिका का लाभ उठा सकता है. इस गुणा-भाग में भारत और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ साझेदारी थाईलैंड के लिए अहम है. ये भावना जनवरी 2024 में थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान दिखी थी. उस समय दोनों पक्षों ने “भारत की एक्ट ईस्ट नीति और थाईलैंड की एक्ट वेस्ट नीति के बीच तालमेल का उल्लेख’ किया था. इसलिए समुद्री क्षेत्र को लेकर थाईलैंड का बहुआयामी दृष्टिकोण बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र के साथ जुड़ी आर्थिक संभावना और सुरक्षा अनिवार्यता की बदलती समझ को दिखाता है जो क्षेत्र के अलग-अलग परिप्रेक्ष्य को उजागर करता है.
अभिषेक शर्मा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में रिसर्च असिस्टेंट हैं.
आदित्य विक्रम राणा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम में रिसर्च इंटर्न हैं.
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