Author : Sanjay Ahirwal

Published on Jan 20, 2018 Updated 0 Hours ago

चीन एक बहुत ही अलग क़िस्म की ताक़त बन कर उभरा है और उसकी बढ़ती ताक़त कई चुनौतियाँ खड़ी करती है।

एक विघटनकारी दुनिया और उसका समाधान

2017 में जो चुनौतियां सामने आईं, वह अलग अभूतपूर्व थीं। कुछ क्वॉर्टर्स में ग्लोबलाइजेशन की थकान के बीच राष्ट्रवाद और पहचान का एक नया मकसद उभरा है। नए सोशल और राजनीतिक एक्टर्स को अहमियत मिलने से कभी बहुत प्रभावशाली रहे उदारवादी देशों की केंद्रीयता खत्म हो रही है। लैंडस्केप में हो रही इस शिफ्टिंग को डिजिटलीकरण, स्वचालन और इंटरकनेक्टिविटी ने और हवा दी है। यह विघटन 2018 में भी जारी रहेगा। नए समीकरण कैसे नजर आएंगे, अभी साफ नहीं है। अभी के लिए हमें मौजूदा हालात पर फिर से सोचना चाहिए। इसी थीम को आगे बढ़ाते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने चार विघटनकारी शक्तियों का ज़िक्र किया।

पहला, चीन की बढ़ती ताक़त,

दूसरा, अमरीका की नियत और आचरण,

तीसरा, आतंकवाद का ख़तरा, और

चौथी , विघटनकारी शक्ति है, ग़ैर बाज़ार अर्थव्यवस्था।

चीन एक बहुत ही अलग ताक़त बन कर उभरा है। कई क्षेत्रों में भारत भी चीन से प्रेरणा लेता है कि अगर चीन यह सब कुछ कर सकता है तो हम क्यूँ नहीं? लेकिन चीन की बढ़ती ताक़त कई चुनौतियाँ भी खड़ी करती है। भारत को समझ में आ रहा है की उसके चारों ओर की दुनिया कितना उस पर निर्भर करती है। और इस नयी ज़िम्मेदारी को भारत को उठाना ही पड़ेगा और इसके लिए अपने को और ताक़तवर और मज़बूत बनाना पड़ेगा।

चीन एक बहुत ही अलग ताक़त बन कर उभरा है। कई क्षेत्रों में भारत भी चीन से प्रेरणा लेता है कि अगर चीन यह सब कुछ कर सकता है तो हम क्यूँ नहीं?

एस जयशंकर की बात को आगे बढ़ाते हुए अमरीकी सेना के पूर्व कमांडर जेनरल डेविड पेट्रेयस ने इंडो-पसिफ़िक क्षेत्र में भारत का बढ़ा महत्व अमरीका पूरी तरह से स्वीकार करता है अब भारत को आगे बढ़ कर इस नए उभरते ग्लोबल ऑर्डर में अपनी जगह सुनिश्चत करनी होगी। अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की नयी सरकार की बदली नीतियों ने आगे का रास्ता तय कर दिया है। पाकिस्तान पर आतंकवाद पर क़ाबू पाने के लिए दबाव बढ़ रहा है। अमरीका ने साफ़ कर दिया है की अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की अब कोई समय सीमा नहीं है। इन सब क़दमों से दक्षिण एशीया में आतंकवाद पर क़ाबू पाने में सहूलीयत होगी।

जेनरल पेट्रेयस ने कहा की आतंकवाद वहीं पनपता है जहाँ सरकारें नहीं होती या कमज़ोर होतीं हैं। आतंकवादी गुट इस राजनीतिक वेक्यूम का फ़ायदा उठाते हैं। इसलिए ज़रूरी है की इस्लामिक देश इस हक़ीक़त को समझें और ख़ुद आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ायी में क़दम आगे बढ़ाएँ। लेकिन दूसरे देशों को भी समझने की ज़रूरत है की यह लड़ाई सबकी है और सबको मिल कर लड़नी होगी। अमरीका यह जनता है की उसे इस युद्ध का नेतृत्व करते रहना होगा और उस के पास साधन भी हैं। लेकिन सभी के सहयोग से ही आतंकवाद के ख़िलाफ़ इस लड़ाई का सार्थक अंत होगा।

लोकतंत्र देशों को उन्हीं तकनीकों ने पलटी दे दी, जो कभी उनका हथियार थी। इस माथापच्ची और मिलीजुली प्रतिक्रिया के बीच 2018 एक ऐसा साल हो सकता है जिसमें ग्लोबल मामलों में खुद को जमाने के लिए राष्ट्र-राज्य अड़ सकते हैं। ऐसे में कुछ देशों के हितों के लिए किया गया उदारवादी अंतर्राष्ट्रीयवाद का वादा उन नई आवाजों, नियमों और एक्टर्स से घिर सकता है, जो उसे अलग करना चाहते हैं और इस से सावधान रहने की ज़रूरत होगी। इस बात को आगे बढ़ाते हुए फ़्रान्स के विदेश मंत्रालय के सेक्रेटेरी जेनरल मॉरीस गौरदो मोंटै ने कहा की उनके देश में भी ऐसे हालात पैदा हो गए थे जब आवाज़ें उठने लगी थीं की अंदरूनी सुरक्षा मज़बूत करने के लिए फ़्रान्स के बॉर्डर बंद किए जाने चाहिए लेकिन राष्ट्रपति एम्मनुएल मैक्रो ने पुरानी नीति में बदलाव से इंकार करते हुए सब को आवाजाही की आज़ादी होनी चाहिए। आतंकवाद से हम सख़्ती से निपटेंगे लेकिन बातचीत के रास्ते खुले रहने चाहिए। यह भी ज़रूरी है की सभी देशों के पास अपने दोस्त और नए गठबंधन चुनने की आज़ादी होनी चाहिए। यह मल्टीलटेरलिसम का दौर है इसलिए सभी मित्र देशों के साथ मिल कर नयी समस्याओं का सामना करने की क्षमता बनानी चाहिए।

लोकतंत्र देशों को उन्हीं तकनीकों ने पलटी दे दी, जो कभी उनका हथियार थी। इस माथापच्ची और मिलीजुली प्रतिक्रिया के बीच 2018 एक ऐसा साल हो सकता है जिसमें ग्लोबल मामलों में खुद को जमाने के लिए राष्ट्र-राज्य अड़ सकते हैं।

सेक्रेटेरी जेनरल मॉरीस गौरदो मोंटै ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति मैक्रो हाल ही में चीन यात्रा पर थे और उन्होंने साफ़ किया कि रिश्ते और व्यापार दोनों एक तरफ़ा नहीं हो सकते। अगर चीन को विश्व के दूसरे बाज़ारों में अपना व्यापार बढ़ाना है तो उसे दूसरों के लिए अपने बाज़ार भी खोलने होंगे। चीन के साथ व्यापार पर जेनरल पेट्रेयस ने कहा की अमरीका का भी चीन में ख़ासा निवेश है जिस के कारण दो लाख से ज़्यादा चीनियों को काम मिला हुआ है। चीन पिछले दो दशकों से हर साल डबल डिजिट विकास कर रहा है और उस का ख़ुद का बाज़ार भी काफ़ी लुभावना है। इसलिए यह नहीं होना चाहिए की चीनी बाज़ार में दूसरे देश व्यापार ना कर पाएँ।

इन सब अनिश्चितता को संभालते हुए हमें 2018 में आगे बढ़ते हुए सोशल, इकनॉमिक और पॉलिटिकल फ्रेमवर्क बनाना और अपनाना होगा। नए वर्ल्ड ऑर्डर में आ रहे नाटकीय बदलाव के लिए नयी रणनीति, नए आईडिया और तरीकों पर ग़ौर कर आगे बढ़ने की ज़रूरत है जिस में भारत की ज़िम्मेदारियाँ कहीं ज़्यादा बढ़ीं हुई होंगीं।

चर्चा ख़त्म होने के बाद अब्ज़र्वर रीसर्च फ़ाउंडेशन के चेयरमन संजय जोशी और वाइस प्रेज़िडेंट समीर सरन ने विदेश सचिव एस जयशंकर को रायसिना डॉयलॉग में दी गयी सभी सहायताओं और समर्थन के किए धन्यवाद देते हुए इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का सह-संस्थापक घोषित कर दिया। श्रोताओं ने भी ताली बजा कर विदेश सचिव को भावभीनी विदायी दी।

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